जानिये क्या होता है डिमांड ड्राफ्ट – What is Demand Draft in Hindi

What is Demand Draft in Hindi – Demand Draft लेन देन के लिए उपयोग किया जाने वाले माध्यमो में से ही एक माध्यम है जिसका उपयोग भुगतान के लिए किया जा सकता है | डिमांड ड्राफ्ट को हम शोर्ट में डीडी भी कहते है और यह एक तरह से भुगतान के लिए सबसे सुरक्षित माध्यम है क्योंकि यह जिसे आप भुगतान करना चाहते है उसके नाम से जारी होता है और कोई भी एजुकेशनल इंस्टिट्यूट जो है वो इसी माध्यम से भुगतान लेना पसंद करते है.

हालाँकि आजकल बहुत से संस्थानों में नेट बैंकिंग और डेबिट/क्रेडिट कार्ड के माध्यम से भी भुगतान लेना शुरू कर दिया है जो एक पेमेंट गेटवे के माध्यम से होता है लेकिन जो इंस्टिट्यूट इतने टेकनिकल नहीं है या लोग भी सभी शत प्रतिशत रूप से डिजिटल नहीं हुए है जिसकी वजह से यह तरीका आज भी जारी है और आने वाले कई सालों तक चलन में रहेगा तो चलिए detail में जानते है कि असल में Demand Draft है क्या और यह कैसे काम करता है –

What is Demand Draft in Hindi

What is Demand Draft in Hindi – जानिये क्या होता है डिमांड ड्राफ्ट

Demand draft को देसी तरीके से समझे तो यह इस तरह से काम करता है कि अगर आपको किसी संस्थान को फीस जमा करवानी है और इसके लिए अगर भुगतान का माध्यम डीडी भी है तो आपको केवल इतना करना है कि bank जाना है और bank के कैश काउंटर पर आपको डीडी के लिए कहना है और जो detail आपको bank को देनी है वो है –

  1. जितने का आप डीडी बनवाना चाहते है |
  2. जिसके लिए आपको डीडी बनाना है उसका नाम आपको बताना है क्योंकि उसी के फेवर में Demand Draft बनता है |
  3. यह सब जानकारी आपको एक फॉर्म में भरनी है जिसमे आपको जितने का डीडी बनाना है और साथ में आपको डीडी बनाने के लिए एक निर्धारित फीस है उसका भुगतान समेत जितने का आप डीडी बना रहे है उसके समेत आपको कैश की detail देनी है और भुगतान करना है | इसके थोड़े देर बाद bank आपको डीडी प्रिंट करके दे देता है |
  4. यह प्रिंट किया हुआ डीडी आप सम्बन्धित संस्थान में जमा करवा सकते है और आपकी फीस उस संस्थान को bank द्वारा दे दी जाएगी |

What is Demand Draft in Hindi – अब जाने डीडी को बैंक की भाषा में – यह एक तरह से भुगतान का एक माध्यम है जिसमे जो person demand draft के लिए अप्रोच करता है तो बैंक उस व्यक्ति के account से (अगर उसका खाता वंहा है ) पैसे काट लेता है या फिर अगर उस व्यक्ति का खाता उस bank में नहीं है जिस bank का Demand Draft उसे बनवाना है तो वह कैश में व्यक्ति से भुगतान लेता है और उसे वांछित रकम का डीडी बना कर दे देता है उसके बाद जिसके नाम पर डीडी बनवाया गया है जिसे हम बैंकिंग भाषा में beneficiary कहते है उसके पास डीडी जमा हो जाने के बाद जब वह beneficiary जब bank में क्लीयरिंग के लिए प्रस्तुत करता है तो bank उसके खाते में पैसे जमा कर देता है |

इस बारे में कुछ खास जानकारियां निम्न है जो आपको पता होना चाहिए –

  • Demand Draft इशू करवाने के लिए आपका उस bank में account होना जरुरी नहीं है जिसमे आप डीडी बनाने के लिए अप्रोच कर रहे है |
  • वैसे आप कितनी भी रकम का डीडी बना सकते है लेकिन अगर यह रकम 50000 से अधिक है तो bank आपसे चेक के जरिये भुगतान करने को कहेगा जिस पर आपका पैन नंबर लिखा होना जरुरी है और अपने अगर गौर किया हो तो यही सेम चीज तब भी होती है जब आप अपने saving account में 50k से अधिक की रकम जमा करते है तो भी bank आपसे आपका पैन नंबर आवश्यक रूप से मांगता है |
  • वैसे नॉर्मली हमे घरेलू लेन देन करने होते है इसलिए हमे indian currency में ही डील करना होता है लेकिन आप किसी दूसरी currency में भी demand draft बनवाना चाहते है तो भी आप bank से उसके लिए कह सकते है
  • Demand draft को आप cheque से भी compare कर सकते हैे किन फिर भी यह cheque से बहुत कुछ मामलों में अलग होता है जिस बारे में हम अगली पोस्ट में बात करेंगे |
  • डीडी की बात करें तो एक और टर्म भी इसमें होती है जिसे हम Crossed Demand Draft भी कहते है और ऐसा करने पर यह केवल account payee हो जाता है जिसके तहत जिस पार्टी के फेवर में यह डीडी बनाया गया है वो इसे केवल account में डिपाजिट करवा सकते है वो इसे इसके जरिये बैंक से कैश नहीं ले सकते है |

What is Demand Draft in Hindi

डिमांड ड्राफ्ट पैसा ट्रांसफर करने के एक प्री-पेड इंस्ट्रूमेंट की तरह है। बैंक रकम और कमिशन लेने के बाद डिमांड ड्राफ्ट जारी करता है। ड्राफ्ट एक खास शख्स/संस्था के नाम जारी किया जाता है। यह किसी खास शहर की किसी खास ब्रांच में ही भुनाया जा सकता है। जिस शख्स के नाम ड्राफ्ट बना होता है, वह उसमें लिखी ब्रांच में इसे जमा करके पैसा हासिल कर सकता है। चूंकि ड्राफ्ट में बैंक पहले ही पैसा ले ले लेता है, इसलिए इसमें बाउंस होने जैसा कोई खतरा नहीं होता। ड्राफ्ट को बैंकर जारी करता है।

Demand Draft Charges – डिमांड ड्राफ्ट बनवाने के लिए हर bank आपसे कुछ रकम इसके एवज में चार्ज करता है और इसके लिए कोई standard charges नहीं है इसलिए यह bank पर निर्भर करता है कि bank ने कितने charges निर्धारित किये है मैंने last time जब स्टेट बैंक से 5000 का डीडी बनवाया था तो bank ने मुझसे 35 INR डीडी के लिए एक्स्ट्रा शुल्क लिया था | इस बारे में आप डीडी बनवाते समय bank से अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते है और मेरे हिसाब से अगर आप अगर किसी ऐसे bank से डीडी बनवा रहे है जिसमे आपका खाता है तो आपको इन्टरनेट बैंकिंग के माध्यम से करना चाहिए क्योंकि उसमे आपका डीडी चार्ज तुलनात्मक रूप से कम होता है |

एक मित्र घर से दूर रहकर दूसरे शहर में पढ़ाई कर रहे सलमान शैख़ को एग्जाम का फॉर्म भरने के लिए बैंक ड्राफ्ट की जरूरत थी। घर के नजदीकी बैंक ने कैश में ड्राफ्ट बनाने से इनकार कर दिया। अलग-अलग बैंक के बहाने थे। कुछ ने कहा स्टाफ कम है, किसी ने कहा कल बनवाना तो किसी ने आई-कार्ड लेकर आने को कहा। आखिर एक बैंक ने ड्राफ्ट तो बना दिया, लेकिन गौरव के कई चक्कर लगाने के बाद। हालांकि बैंक किसी भी बहाने से कैश के बदले बैंक ड्राफ्ट बनाने से इनकार नहीं कर सकते।

बैंक ड्राफ्ट बनवाने के नियम – Bank Draft Building Rules

What is Demand Draft in Hindi

  •  बैंकिंग में हर सर्विस के लिए समयसीमा तय है। बैंकों को अपने नोटिस बोर्ड पर इसकी जानकारी देनी चाहिए। ड्राफ्ट के लिए बैंक कस्टमर को बार-बार चक्कर नहीं लगवा सकते।
  • बैंक ड्राफ्ट के ऊपर वाले हिस्से पर इसकी वेलिडिटी टाइम लिखा होता है। यह अवधि छह महीने होती है। इस वक्त के खत्म होने के बाद भी जारी करने वाली ब्रांच से रिक्वेस्ट कर वेलिडिटी टाइम बढ़ाया जा सकता है।
  • 50,000 रुपये से कम रकम का बैंक ड्राफ्ट कैश में बनवाया जा सकता है, लेकिन ड्राफ्ट कैंसल कराने की स्थिति में कस्टमर को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
  • बैंक कैश में ड्राफ्ट बनाने से इनकार नहीं कर सकते। कैश में ड्राफ्ट बनवाने के लिए बैंक का कस्टमर होना भी जरूरी नहीं है।
  • कैश से ड्राफ्ट बनवाने की स्थिति में बैंक छोटी रकम के नोट लेने से इनकार नहीं कर सकते। आप छोटी-से-छोटी रकम के नोट जमाकर बैंक ड्राफ्ट बनवा सकते हैं।
  • बैंक अकाउंट में ड्राफ्ट जमा किए जाने पर बैंक को फौरन आपके खाते में पैसा ट्रांसफर करना होता है। ड्राफ्ट की एडवाइज न पहुंचने या दूसरे कारणों से बैंक पैसा ट्रांसफर करने से इनकार नहीं कर सकता।

कैसे पाएं डुप्लिकेट डिमांड ड्राफ्ट – How to Get Duplicate Demand Draft

डिमांड ड्राफ्ट गुम हो जाने पर डुप्लिकेट ड्राफ्ट के लिए ड्राफ्ट की डिटेल्स के साथ बैंक को लेटर लिखें। बैंक दूसरे पक्ष की ओर से इसके भुगतान न होने का सबूत मिलते ही आपको डुप्लिकेट डिमांड ड्राफ्ट जारी कर देगा। इसके लिए 15 दिन की समयसीमा तय है। अगर ऐप्लिकेशन दिए जाने के 15 दिन के अंदर आपको डिमांड ड्राफ्ट नहीं मिलता तो देरी के समय के लिए बैंक आपको फिक्स्ड डिपाजिट की दर से ब्याज का भुगतान करेगा। डुप्लिकेट ड्राफ्ट की रिक्वेस्ट सिर्फ उसे बनवाने वाले या पाने वाले (हकदार) द्वारा ही की जा सकती है। कोई तीसरा पक्ष इस तरह का दावा नहीं कर सकता।

डिमांड ड्राफ्ट और पेमेंट ऑर्डर में फर्क – Difference Between Demand Draft and Payment Order

पेमेंट ऑर्डर या बैंकर्स चेक डिमांड ड्राफ्ट जैसे ही होते हैं, लेकिन इन्हें उसी शहर में पेमेंट के लिए जारी किया जाता है, जबकि डिमांड ड्राफ्ट को देश में कहीं भी कैश कराया जा सकता है। डिमांड ड्राफ्ट की वेलिडिटी छह महीने होती है, जबकि पेमेंट ऑर्डर या बैंकर्स चेक की वेलिडिटी आमतौर पर तीन महीने होती है।

हेल्पलाइन – Helpline 

अगर बैंक कैश में बैंक ड्राफ्ट बनाने से इनकार करे या फिर ड्राफ्ट के नाम पर परेशान करे, ज्यादा वक्त लगाए तो इसकी लिखित शिकायत बैंक मैनेजर से करें। बैंक में शिकायत पुस्तिका भी उपलब्ध होती है। अगर ब्रांच मैनेजर किसी भी लेवल पर सहयोग न करे तो अपनी शिकायत बैंक मैनेजर को स्पीड पोस्ट या रजिस्टर्ड पोस्ट से भेजें। एक महीने के अंदर बैंक का जवाब न मिले या आप उस जवाब से संतुष्ट न हों तो बैंकिंग ओम्बड्समैन को जरूर लिखें। दिल्ली, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर और गाजियाबाद जिले के सभी बैंकों के कस्टमर्स अपनी शिकायत दिल्ली एरिया के बैंकिंग ओम्बड्समैन को इस पते पर लिख सकते हैं :

बैंकिंग ओम्बड्समैन, सेकंड फ्लोर, आरबीआई बिल्डिंग, संसद मार्ग, नई दिल्ली-110001
फोन : 011-2373-0632-33, 2373-6270-71
फैक्स : 011-2372-5218
वेबसाइट : www.bankingombudsman.rbi.org.in
ईमेल : [email protected]

रिएलिटी चेक – Reality Cheque

कैश में बैंक ड्राफ्ट बनाने के नाम पर बैंक कस्टमर्स को परेशान करते हैं। एक ड्राफ्ट बनवाने में कस्टमर्स को पसीना आ जाता है। सेंट्रल बैंक रिजर्व बैंक आफ इंडिया द्वारा सर्विस चार्जेज की वसूली के लिए बैंकों को खुली छूट दिए जाने से बैंक कस्टमर्स का जमकर शोषण कर रहे हैं। एक ही सुविधा के लिए सभी बैंकों की दरें अलग-अलग हैं।

Malik Mehrose
Malik Mehrose is a young entrepreneur, author, blogger, and self-taught developer from Jammu and Kashmir. He is the founder and CEO of SHOPYLL, His startup "SHOPYLL" has emerged a new shine to e-commerce business in Jammu and Kashmir, with a vision to boost the e-commerce ecosystem and to uplift industrialization in Jammu and Kashmir.