झिझक दूर करके कॉंफिडेंट और अच्छे स्पीकर बने – Remove Hesitation in Hindi

Remove Hesitation in Hindi – अगर आप लोगों से संपर्क करने और उनके बीच खुल कर बोलने में असहज महसूस करते हैं तो आज से ही इसे बदलने की कोशिश शुरू करें। अंतर्मुखी प्रकृति सफलता में बड़ी बाधा भी बन सकती है। खुद पर विश्वास है तो लोगों के बीच घबराना कैसा?

अगर किसी को अचानक एक बड़े जनसमूह के सामने कुछ बोलने के लिए कह दिया जाए तो अधिकतर लोग बुरी तरह घबरा जाते हैं। हालांकि इस बात का आपकी योग्यता से कोई लेना-देना नहीं होता, फिर भी यह बात आपकी छवि को नकारात्मक रूप से प्रभावित करती है। ऐसा पढ़ाई के दिनों में, नौकरी के लिए दिए जाने वाले साक्षात्कार के समय, नौकरी के दौरान या कभी भी हो सकता है। इससे लोग आपका सही मूल्यांकन नहीं कर पाते और आप कई अवसरों से चूक जाते हैं। इस हिचक को तोड़ना बहुत मुश्किल भी नहीं है। यह हिचक तोड़ कर आप सफलता के कुछ और करीब हो जाएंगे। बस आपको अपने डर पर काबू पाना होगा। इसकी शुरुआत आप यूं कर सकते हैं-

अपने मजबूत पक्ष याद रखें

दूसरों के सामने बोलने में होने वाली हिचक दरअसल सोशल एंग्जाइटी का नतीजा होती है। ऐसे में आप अपना उद्देश्य याद रखें, ना कि उसमें अपनी सफलता या असफलता। अपनी कमजोरियों के बारे में सोचने की बजाय अपने व्यक्तित्व के मजबूत पक्ष के बारे में सोचें। उन वजहों को तलाशने की कोशिश करें, जिनके कारण आपको झिझक या संकोच महसूस होता है। इसकी तीन संभावित वजहें हो सकती हैं। मुमकिन है कि आप खुद को लेकर आश्वस्त न हों। खुद के बारे में जरूरत से ज्यादा सोचते हों या जब कोई आपकी तारीफ करता है तो आप उस पर यकीन न कर पाते हों। इसे दूर करने के लिए लोगों के बीच बोलने की प्रैक्टिस कर सकते हैं। प्रेरक किताबें पढ़ें। यदि आवश्यकता लगे तो काउंसलर की सहायता भी ले सकते हैं।

परिचितों से करें शुरुआत

लोगों के बीच आत्मविश्वास से बोलने के अभ्यास की पहल दोस्तों से करें। जब आप यहां सहज महसूस करने लगें, तब अपरिचितों के बीच इसे आजमाएं। इसे भी एक-दो लोगों से ही शुरू करें। अगर आप शुरू में ही सीधे बड़े समूह में बात रखने की कोशिश करेंगे तो बहुत अधिक दबाव होने के कारण संभवत: कठिनाई भी ज्यादा होगी। आप पाएंगे कि दो व्यक्तियों के सामने बोलने में आपको तुलनात्मक रूप से ज्यादा आसानी हुई और यह भी कि जल्द ही आपकी हिचक टूट गई और अब विशाल जनसमूह में भी अपनी बात रखने में कोई परेशानी नहीं हो रही है।

नियमित अभ्यास की है जरूरत

हिचक मिटाने के लिए आपको नियमित रूप से प्रयास करना जरूरी है। अपने डर पर आपको विजय पानी होगी। उसे खुद पर हावी न होने दें। शुरू-शुरू में ऐसा करने में आप खुद को असहज महसूस करेंगे, लेकिन लगातार प्रयास करते रहें। धीरे-धीरे आप महसूस करेंगे कि आपको अब अपनी बात रखने के लिए प्रयास नहीं करना पड़ रहा है, आप बड़ी सहजता सेे अपनी बात रख पा रहे हैं।

बेवजह के परिचय से बचें

बड़ा सामाजिक दायरा होने का एक अर्थ यह भी है कि आपको लोगों का सामना करने में हिचक नहीं होती। यह आपके आत्मविश्वासी व्यक्तित्व का द्योतक भी है। आप भी अपना सोशल सर्कल बड़ा करें। इसके लिए खुद अपने क्षेत्र से जुड़े कार्यक्रमों पर नजर रखें। अपने परिचितों से यह कह सकते हैं कि वे ऐसे कार्यक्रमों की जानकारी आपको दे दिया करें। एक समय के बाद आप अपनी मर्जी से भी आयोजनों को चुनें कि कहां जाना है या नहीं जाना है। इसका एक कारण यह भी है कि अंतर्मुखी ना होने का मतलब यह नहीं है कि हर जगह या समूह में आपकी उपस्थिति जरूरी हो। बेमतलब किसी ईवेंट या समूह में न जाएं।

अपनी तैयारी पूरी रखें 

अगर आप सच में लोगों का ध्यान अपनी ओर आकर्षिक करना चाहते हैं तो इस नुस्खे को आजमाएं। अगर आप किसी सामूहिक आयोजन में जा रहे हैं या कई लोगों के सामने आपको कुछ बोलना है तो विषय आदि के बारे में पूरी जानकारी कर लें। अपनी भाषा पर भी खास ध्यान दें। ऐसी स्थिति में उच्चारण, शब्दों के उचित चयन आदि का विशेष महत्व होता है। उस कार्यक्रम की पूरी रूप-रेखा और वहां आने वाले मेहमानों के बारे में मुकम्मल जानकारी रखें। अनौपचारिक आयोजनों में वहां आने वाले आगंतुकों की मदद करें, उन्हें कार्यक्रम और मेहमानों के बारे में अपनी तरफ से पहल कर बताएं। इस तरह से आप वहां आने वाले दूसरे लोगों की मदद कर अपनी छवि बेहतर बना सकते हैं और लोग आप पर ध्यान देंगे।

मुस्कराहट से काम लें

किसी भी प्रेजेंटेशन में या कि किसी सामाजिक स्थिति में कई लोगों के बीच मुस्कराहट से आपकी छवि का तुरंत प्रभाव बनता है। इसी से अपनी बात की शुरुआत करें। मुस्कराहट से मानसिक तनाव भी कम हो जाता है और आप ज्यादा आत्मविश्वास अनुभव करते हैं। सुनने वालों से आपका एक जुड़ाव तुरंत बन जाता है। औपचारिक या अनौपचारिक माहौल में भी बोलते समय मुस्कराहट महत्वपूर्ण मानी जाती है।

प्रेजेंटेशन स्किल्स पर क्लाउड आधारित प्रेजेंटेशन प्लेटफॉर्म कंपनी प्रेजी के एक ताजा सर्वे के प्रमुख नतीजों के अनुसार-

  • 70 फीसदी कर्मचारियों (कुल सैंपल में से) ने माना कि सफलता के लिए प्रेजेंटेशन स्किल होना जरूरी है।
  • 20 फीसदी कर्मचारियों ने माना कि प्रेजेंटेशन के लिए लोगों के सामने ना आना पड़े, इसके लिए वे कुछ भी कर सकते हैं।

Remove Hesitation in Hindi

शर्म और झिझक यानी Hesitation से पाएं छुटकारा

निचे कुछ उपाय लिख रहा हूँ उम्मीद ही नहीं मुझे यकीन भी है की अगर इसे ठीक ठीक किया जाए तो कोई भी अपने अन्दर के शर्म और झिझक से छुटकारा पा सकता है.

  1. अपने चेहरे पर मुस्कान रखें:- “मुस्कराहट पर खर्चा कुछ नहीं आता और इसे पाने वाले मालामाल हो जाते हैं, लेकिन देने वाले भी दारिद्र नहीं हो जाता. यह एक पल में उत्पन्न होती है और इसकी स्म्रति कभी कभी सदा के लिए बनी रह जाती है. हंसमुख व्यक्ति स्वंय तो खुश रहता ही है, दूसरों को भी खुश रखता है. लोग उसके पास खींचे चले आते हैं. उसे किसी से मिलने या बात करने में झिझक महसूस नहीं होती. मुस्कराहट वाला आदमी कोई भी काम आसानी से कर लेता है. Shakespeare ने भी कहा है कि तुम्हें क्या चाहिए? तुम्हें जो कुछ भी चाहिए उसे अपनी मुस्कराहट से प्राप्त करो, न कि तलवार के जोर से. जब आप मुस्कुराते हैं तो सामने वाले पर इसका असर खुशनुमा होता है और वह ख़ुशी के साथ आपसे बात करता है, जब आप खुश हों, आप से बात करने वाला खुश हो तो रास्ते खुलते हैं बंद नहीं होते.
  2. मेल जोल बढ़ाएं:-Club, Party या Function में हिस्सा लें क्यूंकि याह भांति भांति के लोग आते है. उनसे करीब हों और स्वंय आगे बढ़ बात करने की चेष्टा करें. उनके पास मुस्कुराते हुए जाएं औए अपना introduction दें, फिर उनका नाम पूछ कर उनसे बात करना शुरू कर दें. याद रखें नाम पहले पूछना है बाद में नहीं.
  3. Question पूछने की आदत डालें:-स्वंय introduction देने के बाद आप सामने वाले से Question पूछें और उसका Answer ध्यान के साथ सुने. आप भीड़ या फिर मौसम को ले कर बात चीत शुरू कर सकते हैं. अगर Question पूछने का कला आपके अन्दर आ गया तो आप कभी भी कहीं भी संव्य को अकेला नहीं पाएंगे. याद रखें Class में जो Question पूछता है उस पर बच्चे थोड़ी देर हँसते हैं लेकिन जो नहीं पूछता उस पर लोग ज़िन्दगी भर हँसते हैं.
  4. खुद को पहचानें:-संकोची स्वभाव वाले लोग अपने आप को हीन या छोटा समझते है. उनकी यह सोच उन्हें संकोची या शर्मीला बना देती है. यदि आप सामने वाले व्यक्ति को किसी कारण से Special मानते है तो आपके अन्दर भी कोई ऐसा गुण होगा जो आपकी Special बनता हो. ज़रूरत है अपने आप को पहचानने की, अपन अन्दर मौजूद Qualities को जाने. जिसके दिल में अच्छे भावनाओं का संचार होता है वो कभी हीनभावना का शिकार नहीं होता. जिसकी वजह से संकोच और Hesitation अपने आप समाप्त होने लगती है.
  5. Friend बनाएं:-दोस्त बनाने का सब से अच्छा तरीका ये है कि आप खुद दोस्त बने. आप जैसा खुद को समझते हैं वैसा ही दुसरे को समझें और पुरे Confidence के साथ दोस्त बने. यह आपको ताक़त देता है झिझक (Hesitation) दूर करने में.

अच्छा वक्ता किस तरह से बना जा सकता है – be a Great Speaker

कुछ लोग जन्मजात वक्ता होते हैं. वे कहीं पर भी अपने मन की बात को सरलता के साथ पेश कर सकते हैं। अच्छी खबर है कि अब हर कोई अच्छा वक्ता बन सकता है. अच्छा वक्ता बनने के लिए आपको कुछ खास बातों का ध्यान रखना होगा. आप जिस विषय पर बोलने वाले हैं, उसके बारे में आपको पूरी जानकारी होनी चाहिए। फिर चाहे अवार्ड सेरेमनी हो या कंपनी मीटिंग, आपको बात कहने में किसी तरह की झिझक नहीं होगी. जानते हैं कि अच्छा वक्ता किस तरह से बना जा सकता है-

तुरंत करें शुरुआत – 

जैसे ही आपको पता लगे कि आपको कहीं पर भाषण देना है या अपनी बात रखनी है तो आपको तुरंत तैयारी शुरू कर देनी चाहिए। आप जितनी देर से भाषण की तैयारी करेंगे, आपकी घबराहट भी उतनी ही ज्यादा बढ़ जाएगी। आपको अपने दिमाग में चल रहे सभी विचारों को इकट्ठा करना चाहिए। अगर आप अपने सभी विचारों को सही तरह से संभाल लेंगे तो आपको बाद में किसी तरह की परेशानी नहीं आएगी। आइडियाज के लिए बुक्स, मैग्जीन और वेबसाइट्स की मदद लेनी चाहिए। तैयारी से आपको फायदा होगा.

सवाल पूछते रहें – 

आपको अपने भाषण को शानदार बनाने के लिए श्रोताओं से रोचक सवाल पूछने चाहिए। इससे आपको सोचने का मौका मिल जाता है, वहीं श्रोता आपके साथ अच्छी तरह से जुड़ पाते हैं। अगर आप सीधा-सपाट भाषण देते जाएंगे और श्रोताओं को समझने की कोशिश नहीं करेंगे तो आपके भाषण में कोई भी रुचि नहीं लेगा। आपको भाषण को बेहतरीन बनाने के लिए दिलचस्प बातों का सहारा लेना चाहिए। इससे लिए आपको भाषण के विषय को लेकर पूरी रिसर्च जरूरी करनी चाहिए।
अगर आप अपने दिमाग का सही तरह से इस्तेमाल करते हैं, तो आपको सफल होने से कोई भी नहीं रोक सकता। आपको अपने दिमाग के काम करने के तरीके के बारे में पूरी जानकारी प्राप्त करनी चाहिए। इसके बाद आपको अपने ब्रेन को बूस्टअप करना चाहिए। आपको अपने ब्रेन की क्षमताओं पर भरोसा करके मंजिल प्राप्त करने की दिशा में जुट जाना चाहिए.

दिमाग पर डालें जोर –

रोज सोने से पहले पूरे दिन की गतिविधियों पर गौर करने की आदत डालनी चाहिए। आपको छोटी-छोटी बातों पर विचार करना चाहिए। इससे दिमाग मजबूत बनता है। खुद से सवाल करें- आज दिनभर में मैंने क्या खास सीखा? रूटीन के किस काम को मैंने अलग तरह से पूरा किया? क्या मैंने आज अपने दिमाग को किसी तरह की चुनौती दी? काम के दौरान हुई खास चीजों को याद करने की कोशिश करें। आप जिन लोगों से मिले, उनके नाम दोहराएं। पूरे दिन क्या-क्या खाया, याद करने की कोशिश करें। आप दिमाग पर जितना ज्यादा जोर डालेंगे, वह उतना ही सक्रिय रहेगा.

तनाव से दूर – 

तनाव दिमाग को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाता है। आपको किसी भी बात की टेंशन नहीं लेनी चाहिए। टेंशन के कारण दिमाग काम करना बंद कर देता है। आपको अपने तनाव को नियंत्रित रखना चाहिए। आपको पता होना चाहिए कि आप किस बात से सबसे ज्यादा तनाव में आ जाते हैं। इस चीज को दूर करने के लिए आपको क्रिएटिव तरीकों की मदद लेनी चाहिए। आपको दिमाग को कुछ देर के लिए खाली भी छोडऩा चाहिए। इस दौरान संगीत सुन सकते हैं या अपना मनपसंद काम कर सकते हैं। इससे दिमाग को एक ब्रेक मिलता है और वह पूरी ऊर्जा के साथ दुबारा काम करने के लिए तैयार होता है।

दिमाग को रखें हमेशा एक्टिव – 

विभिन्न शोध बताते हैं कि दिमाग को जितना ज्यादा व्यस्त रखते हैं, दिमाग उतना ही शॉर्प बनता है। दिमाग भी शरीर के बाकी अंगों की तरह होता है। जिस तरह से अगर हम व्यायाम नहीं करते हैं, तो शरीर मजबूत नहीं बनता है। उसी तरह अगर हम दिमाग को व्यस्त नहीं रखते हैं, तो यह धीरे-धीरे सुस्त हो जाता है। आपको रोज नई स्किल्स सीखने का प्रयास करते रहना चाहिए। इससे दिमाग पर जोर पड़ता है और दिमाग हमेशा सक्रिय रहता है।

बचें मल्टीटास्किंग से

कुछ लोगों को लगता है कि एक साथ कई काम करने से समय बचता है, पर मल्टीटास्किंग से दिमाग को काफी नुकसान पहुंचता है। दिमाग एक काम को एक समय में बेहतर तरीके से पूरा कर सकता है, जबकि वर्तमान दौर में प्रोफेशनल लाइफ में मल्टीटास्किंग को एक गुण की तरह देखा जाता है। जो व्यक्ति कम में जितने ज्यादा काम करता है, वह उतना ही सफल माना जाता है, पर मल्टीटास्किंग से आपकी सीखने की आदत खत्म होती जाती है और आप एक मशीन बनने लगते हैं। आप काम को लेकर सतही बनने लगते हैं और क्रिएटिविटी खत्म हो जाती है।

दिमाग से करें बातें – 

आपको अपने कार्यों या लक्ष्यों को लिख लेना चाहिए। ये लक्ष्य रोज के भी हो सकते हैं और लॉन्ग टर्म के भी। इन्हें अलग-अलग लिखना जरूरी होता है। इससे आप काम को एक निश्चित क्रम में करने के लिए प्रेरित होते हैं और आपके दिमाग से प्रेशर खत्म होता है और खुद को मोटिवेट कर पाते हैं। लॉन्ग टर्म गोल्स के लिए खुद से पूछते रहें कि आप ऐसा क्यों कर रहे हैं। अगर आप अपने दिमाग से बात करने की आदत बना लेंगे, तो आपको समझ में आने लगेगा कि आपको आगे क्या करना है। कुछ लोग सिर्फ काम किए जाते हैं, उन्हें पता ही नहीं होता कि दिमाग कुछ और कह रहा है और वे कुछ और काम कर रहे हैं। इसलिए दिमाग से संवाद जरूरी है।

हो कोई उद्देश्य – 

हर स्पीच का एक उद्देश्य होता है। आप चाहे धन्यवाद देना चाहते हों या टारगेट देना चाहते हों या लोगों को किसी काम के लिए तैयार करना चाहते हों। अपने आप से सवाल करें कि आप स्टेज पर क्यों जा रहे हैं। मन में उद्देश्य स्पष्ट होगा, तो अच्छी तरह से भाषण दे पाएंगे।

भीड़ को जानें – 

अगर भाषण को यादगार बनाना चाहते हैं तो पता होना चाहिए कि आप किन लोगों के सामने बात रख रहे हैं। जब यह पता लग जाता है कि बात को कौन सुनने वाला है तो उनकी रुचियों और लक्ष्यों के अनुरूप बात पेश कर सकते हैं।

अभ्यास से बनेंगे परफेक्ट – 

जैसे ही आपका भाषण तैयार हो जाए, वैसे ही किसी व्यक्ति को उसे सुनाना चाहिए और अपनी कमियां दूर करनी चाहिए। भाषण को बोलकर तैयारी करनी चाहिए। इससे आत्म विश्वास पैदा होगा और मंच पर घबराहट नहीं होगी। आपको अपने परिचितों को भाषण सुनाते समय उनके चेहरों पर गौर करना चाहिए कि क्या उनकी रुचि बढ़ रही है या कम हो रही है। इससे पता लग जाएगा कि आपका भाषण रोचक है या नहीं।
समय का ध्यान रखें.

कोई भी श्रोता लंबी बात में रुचि नहीं लेता है। इसलिए आपको अपनी बात को संक्षिप्त रखना चाहिए। श्रोताओं का ध्यान भटकने से पहले ही आपको मुद्दे की बात कह देनी चाहिए। आपको तयशुदा समय में अपना भाषण पूरा करना चाहिए। अगर आप समय का ध्यान नहीं रखेंगे तो श्रोता उठकर भी जा सकते हैं। कम समय में बेहतर तरीके से अपनी बात रखेंगे तो हर कोई आपका कायल हो जाएगा।

अपनी बात न कहें – 

कोई भी भाषण सिर्फ आपकी कहानी नहीं होना चाहिए। भाषण के दौरान आपको भीड़ में कुछ लोगों पर फोकस करना चाहिए। वे आपके परिचित भी हो सकते हैं और अनजान भी। आप उनसे सवाल कर सकते हैं या उन्हें इंगित करके कोई उदाहरण पेश कर सकते हैं.

स्मार्ट शुरुआत करें – 

जब भी भाषण की शुरुआत होती है, हर किसी व्यक्ति का ध्यान आप पर ही होता है। इसलिए शुरुआत में आप कोई मजेदार घटना बता सकते हैं। अपनी बात को किसी उदाहरण या चुटकुले की मदद से भी प्रस्तुत कर सकते हैं.

अगर आप अपने दिमाग का सही तरह से इस्तेमाल करते हैं, तो आपको सफल होने से कोई भी नहीं रोक सकता। आपको अपने दिमाग के काम करने के तरीके के बारे में पूरी जानकारी प्राप्त करनी चाहिए। इसके बाद आपको अपने ब्रेन को बूस्टअप करना चाहिए। आपको अपने ब्रेन की क्षमताओं पर भरोसा करके मंजिल प्राप्त करने की दिशा में जुट जाना चाहिए।

हेलो दोस्तों ! ये मेरी आजकी सन्डे स्पेशल पोस्ट है इसको पढ़े और अपने दोस्तों के साथ शेयर करे . धन्यवाद  -Eisa Rahi

Malik Mehrose
Malik Mehrose is a young entrepreneur, author, blogger, and self-taught developer from Jammu and Kashmir. He is the founder and CEO of SHOPYLL, His startup "SHOPYLL" has emerged a new shine to e-commerce business in Jammu and Kashmir, with a vision to boost the e-commerce ecosystem and to uplift industrialization in Jammu and Kashmir.