क्या मांसाहार मुसलमानों को हिंसक बनता है – Muslims And Non-veg

मांसाहारी भोजन मुसलमानों को हिंसक बनाता है?

Islam Aur Non veg

Muslims And Non-veg 

प्रश्नः विज्ञान हमें बताता है कि मनुष्य जो कुछ खाता है उसका प्रभाव उसकी प्रवृत्ति पर अवश्य पड़ता है, तो फिर इस्लाम अपने अनुयायियों को मासाहारी आहार की अनुमति क्यों देता है? यद्यपि पशुओं का मांस खाने के कारण मनुष्य हिंसक और क्रूर बन सकता है?

उत्तरः केवल वनस्पति खाने वाले पशुओं को खाने की अनुमति है। मैं इस बात से सहमत हूँ कि मनुष्य जो कुछ खाता है उसका प्रभाव उसकी प्रवृत्ति पर अवश्य पड़ता है। यही कारण है कि इस्लाम में मांसाहारी पशुओं, जैसे शेर, चीता, तेंदुआ आदि का मांस खाना वार्जित है क्योंकि ये दानव हिंसक भी हैं। सम्भव है इन दरिन्दों का मांस हमें भी दानव बना देता।

यही कारण है कि इस्लाम में केवल वनस्पति का आहार करने वाले पशुओं का मांस खाने की अनुमति दी गई हैं। जैसे गाय, भेड़, बकरी इत्यादि। यह वे पशु हैं जो शांति प्रिय और आज्ञाकारी प्रवृत्ति के हैं। मुसलमान शांति प्रिय और आज्ञाकारी पशुओं का मांस ही खाते हैं। अतः वे भी शांति प्रिय और अहिंसक होते हैं।

पवित्र क़ुरआन का फ़रमान है कि रसूल अल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) बुरी चीज़ों से रोकते हैं। पवित्र क़ुरआन में फ़रमान हैः
‘‘वह उन्हें नेकी का हुक्म देता है, बदी से रोकता है, उनके लिए पाक चीज़ें हलाल और नापाक चीज़ें हराम करता है, उन पर से वह बोझ उतारता है जो उन पर लदे हुए थे। वह बंधन खोलता है जिनमें वे जकड़े हुए थे।’’ (पवित्र क़ुरआन , 7ः157)

एक अन्य आयत में कहा गया हैः
‘‘जो कुछ रसूल तुम्हें दे तो वह ले लो और जिस चीज़ें से तुम्हें रोक दे उसमें रुक जाओ, अल्लाह से डरो, अल्लाह सख़्त अज़ाब (कठोरतम दण्ड) देने वाला है।’’ (पवित्र क़ुरआन , 7ः159)

मुसलमानों के लिए महान पैग़म्बर का यह निर्देश ही उन्हे कायल करने के लिए काफ़ी है कि अल्लाह तआला नहीं चाहता कि वह कुछ जानवरों का मांस खाएं जबकि कुछ का खा लिया करें।

इस्लाम की सम्पूर्ण शिक्षा पवित्र क़ुरआन और उसके बाद हदीस पर आधारित है। हदीस का आश्य है मुसलमानों के महान पैग़म्बर हज़रत मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) का कथन जो ‘सही बुख़ारी’, ‘मुस्लिम’, सुनन इब्ने माजह’, इत्यादि पुस्तकों में संग्रहीत हैं। और मुसलमानों का उन पर पूर्ण विश्वास है। प्रत्येक हदीस को उन महापुरूषों के संदर्भ से बयान कया गया है जिन्होंने स्वंय महान पैग़म्बर से वह बातें सुनी थीं।

पवित्र हदीसों में मांसाहारी जानवर का मांस खाने से रोका गया है

सही बुख़ारी, मुस्लिम शरीफ़ में मौजूद, अनेक प्रमाणिक हदीसों के अनुसार मांसाहारी पशु का मांस खाना वर्जित है। एक हदीस के अनुसार, जिसमें हज़रत इब्ने अब्बास (रज़ियल्लाहु अन्हु) के संदर्भ से बताया गया है कि हमारे पैग़म्बर (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने (हदीस नॉ 4752), और सुनन इब्ने माजह के तेरहवें अध्याय (हदीस नॉ 3232 से 3234 तक) के अनुसार निम्नलिखित जानवरों का मांस खाने से मना किया हैः

1. वह पशु जिनके दांत नोकीले हों, अर्थात मांसाहारी जानवर, ये जानवर बिल्ली के परिवार से सम्बन्ध रखते हैं। जिसमें शेर, बबर शेर, चीता, बिल्लियाँ, कुत्ते, भेड़िये, गीदड़, लोमड़ी, लकड़बग्घे इत्यादि शामिल हैं।

2. कुतर कर खाने वाले जानवर जैसे छोटे चूहे, बड़े चूहे, पंजों वाले ख़रगोश इत्यादि।

3. रेंगने वाले कुछ जानवर जैसे साँप और मगरमच्छ इत्यादि।

4. शिकारी पक्षी, जिनके पंजे लम्बे और नोकदार नाख़ून हों (जैसे आम तौर से शिकारी पक्षियों के होते हैं) इनमें गरूड़, गिद्ध, कौए और उल्लू इत्यादि शामिल हैं।

ऐसा कोई वैज्ञानिक साक्ष्य नहीं है जो किसी सन्देह और संशय से ऊपर उठकर यह सिद्ध कर सके कि मांसाहारी अपने आहार के कारण हिसंक भी बन सकता है।

Malik Mehrose
Malik Mehrose is a young entrepreneur, author, blogger, and self-taught developer from Jammu and Kashmir. He is the founder and CEO of SHOPYLL, His startup "SHOPYLL" has emerged a new shine to e-commerce business in Jammu and Kashmir, with a vision to boost the e-commerce ecosystem and to uplift industrialization in Jammu and Kashmir.