मुसलमान तीन तलाक में बदलाव क्यों नहीं चाहते – Musalman Aur Teen Talaaq Hindi

मुसलमान तीन तलाक में बदलाव क्यों नहीं चाहते – Musalman Aur Teen Talaaq Hindi

Musalman Aur Teen Talaaq Hindi

Musalman Aur Teen Talaaq Hindi – भारत में लगभग 20 करोड़ मुसलमान रहते हैं. उनकी शादी और तलाक के मामले मुस्लिम पर्सनल लॉ के मुताबिक तय होते हैं, जो शरिया कानून पर आधारित होते हैं. जैसे की हिन्दू अपने ‘हिन्दू पर्सनल लॉ’ से गवर्न होते है. शायरा बानो और दूसरी दो तीन औरतों ने (जिनका असल मामला क्या है ये तो अल्लाह ही जनता है) अपनी याचिका में केवल तिहरे तलाक नहीं बल्कि हलाला और बहुविवाह जैसी व्यवस्था को भी चुनौती दी है. आज के इस आर्टिकल में मैं आपको इन तीनो चीज़ों (तीन तलाक, हलाला और बहुविवाह) के बारे में डिटेल्स के साथ बताऊंगा कि ये क्या है और मुसलमान इसमें बदलाव क्यों नहीं करना चाहते है

#1.तीन तलाक Teen Talaaq – यूं तो तलाक़ कोई अच्छी चीज़ नहीं है और सभी लोग इसको ना पसंद करते हैं इस्लाम में भी यह एक बुरी बात समझी जाती है लेकिन इसका मतलब यह हरगिज़ नहीं कि तलाक़ का हक ही इंसानों से छीन लिया जाए, पति पत्नी में अगर किसी तरह भी निबाह नहीं हो पा रहा है तो अपनी ज़िदगी जहन्नम बनाने से बहतर है कि वो अलग हो कर अपनी ज़िन्दगी का सफ़र अपनी मर्ज़ी से पूरा करें जो कि इंसान होने के नाते उनका हक है, इसी लिए दुनियां भर के कानून में तलाक़ की गुंजाइश मौजूद है.
और इसी लिए पैगम्बरों के दीन (धर्म) में भी तलाक़ की गुंजाइश हमेशा से रही है.

तलाक हर हाल में एक ही दी जाएगी दो या तीन या सौ नहीं, जो लोग जिहालत की हदें पार करते हुए दो तीन या हज़ार तलाक बोल देते हैं यह इस्लाम के बिल्कुल खिलाफ अमल है और बहुत बड़ा गुनाह है अल्लाह के रसूल (सल्लाहू अलैहि वसल्लम) के फरमान के मुताबिक जो ऐसा बोलता है वो इस्लामी शर्यत और कुरआन का मज़ाक उड़ा रहा होता है. लेकिन तीन तलाक एक बेहद नापसंदीदा काम होते हुए भी एग्जीक्यूट होता है, मतलब अगर कोई तीन तलाक दे देता है तो वह बहुत बड़ा गुनाह करता है लेकिन पत्नी पर तीन तलाक पड़ जाएगी।

जो लोग यह कहते है की तीन तलाक क़ुरान और हदीस के खिलाफ है उन्हें मैं बता दूँ की तीन तालक क़ुरआन और हदीस से साबित है कोई बाद की बनायीं हुई चीज़ नहीं है. सबूत के लिए मैं यहाँ क़ुरआन की आयत और कुछ हदीसे लिख रहा हूँ :-

(فا ن طلقها فلا تحل له من بعد حتى تنكح زوجا غيره (پارہ ٢ آیت ٢٣٠ القرآن 

तर्जुमा : फिर अगर शोहर अपनी बीवी को (तीसरी) तलाक दे दे तो तलाकशुदा औरत उसके लिए उस समय तक हलाल न होगी जबतक कि वह किसी दूसरे मर्द से निकाह न कर ले।  

#1. हुज़ूर पाक (सल्ललाहु अलैहि वसल्लम) के ज़माने हज़रत इबादा इब्ने सामित के बाप ने अपनी बीवी को एकदम हज़ार तलाक दे दी तो उसकी औलाद ने हुज़ूर पाक (सल्ललाहु अलैहि वसल्लम) की खिदमत में हाज़िर होकर अर्ज़ किया “ए अल्लाह के रसूल बेशक हमारे बाप ने हमारी माँ को एकदम हज़ार तलाक दे दी है तो क्या उसके लिए इससे निकलने की कोई सूरत है? हुज़ूर पाक (सल्ललाहु अलैहि वसल्लम) ने फ़रमाया ” तुम्हारा बाप अल्लाह से नहीं डरा तो अल्लाह अपने हुक्म से इसके लिए निकलने की सूरत क्या पैदा करे। उसकी बीवी तो तीन तलाक ही से उससे अलग हो गयी और बाकी 997 तलाक का गुनाह उसके सर पर है” (दारे कुतनी, भाग 4, पेज 20. दुर्रे मंसूर, भाग दे, भाग 2, पेज 333)

#2. हज़रत अब्दुल्लाह इब्ने उम्र फरमाते है कि मैंने हुज़ूर पाक (सल्ललाहु अलैहि वसल्लम) से अर्ज़ किया “अगर मैं अपनी बीवी को एकदम तीन तलाक दे दूँ तो क्या वह मेरे लिए हलाल होगी, अगर मैं उससे रुजू करूँ? हुज़ूर पाक (सल्ललाहु अलैहि वसल्लम) ने फ़रमाया नहीं! वह तुझसे अलग हो जाएगी और ऐसा करना गुनाह है” (दारे कुतनी, भाग 4, पेज 31)

#3. सय्यदना हज़रत इमाम हसन इब्ने अली इब्ने अबी तालिब (रजि०) फरमाते है कि “मैंने हुज़ूर पाक (सल्ललाहु अलैहि वसल्लम) से सुना, आप (सल्ललाहु अलैहि वसल्लम) न फ़रमाया जो आदमी अपनी बीवी को तीन तलाक दे हर तुंहर में एक-एक करके या हर माह के शुरू में एक-एक करके या इकठ्ठी तीन तलाक दे दे तो उसकी बीवी हलाल नहीं होगी जब तक वह किसी दूसरे आदमी से निकाह न कर ले” (दारे कुतनी, भाग 4, पेज 31)

इसके अलावा और भी बहुत सारी हदीसे है जिनसे साबित होता है की तीन तलाक तीन ही है एक नहीं। यहाँ मैने सिर्फ तीन हदीसो को लिखा क्योंकि हमारा टॉपिक है की मुस्लमान शरीयत में बदलाव क्यों नहीं चाहते। हुज़ूर पाक (सल्ललाहु अलैहि वसल्लम) के बाद सहाबा के ज़माने में भी तीन तालक तीन ही थी उसके बाद इमाम अब हनीफा के ज़माने में भी तीन तलाक तीन ही थी.

#2. हलाला – Halala : शरीयत कानून में हलाला एक तरह से तीन तलाक देने के बाद शौहर के लिए हराम हो चुकी उसी बीवी को दोबारा हासिल करने का तरीका है. यानी तीन तलाक देने के बाद अगर तीन तलाक देने वाला पति उस औरत से फिर से शादी करना चाहे तो नहीं कर सकता है जब तक की वह औरत किसी और आदमी से शादी न कर ले और वह दूसरा आदमी उसको कोई तलाक न दे दे. मतलब एक आदमी ने अपनी पत्नी को तीन तालाक दे दिए और अब उससे शादी करना चाहता है तो वह उस औरत से शादी नहीं कर सकता। लेकिन अगर उस औरत ने किसी दूसरे आदमी से शादी कर ली और किसी वजह से दूसरे आदमी ने उसको तलाक दे दी तो अब पहला आदमी उस औरत से शादी कर सकता है. इस पूरी प्रक्रिया को हलाला कहते हैं.

यहाँ एक बात याद रखने की है कि जिस आदमी ने तीन तलाक दी है वह दोबारा शादी करने के लिए उस औरत की किसी दूसरे आदमी से इस शर्त पर शादी नहीं करा सकता की आप इससे शादी कर लो और फिर कुछ दिन बाद इसको तलाक दे देना ताकि मैं इससे फिर से शादी कर सकूँ, ये ऐसी शर्त लगाना इस्लाम में बिलकुल हराम है इसको समझ लो क्योंकि बहुत से जाहिल इस बात को लेकर इस्लाम को बदनाम करने की कोशिश करते है. याद रहे यह इत्तिफ़ाक से हो तो जायज़ है जान बूझ कर या प्लान बना कर किसी और मर्द से शादी करना और फिर उससे सिर्फ इस लिए तलाक लेना ताकि पहले शोहर से निकाह जायज़ हो सके यह साजिश सरासर नाजायज़ है और अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने ऐसी साजिश करने वालों पर लानत फरमाई है

#3. बहुविवाह – 4 Marriage : शरीयत कानून मुस्लिम पुरुष को चार निकाह की इजाजत देता है. हालांकि इसमें पति को अपनी पहली पत्नी से दूसरे निकाह की अनुमति लेनी होती है. रही बात मर्द की चार शादी करने की इजाजत की तो और इस्लाम में चार शादी करना फर्ज नहीं है सिर्फ इजाजत है अगर आपको लगता है के आप चार में इंसाफ नहीं कर सकते तो एक शादी ही करनी है आपको. बल्कि क़ुरान में इस पर जोर दिया गया है के तुम इंसाफ नहीं कर पाओ तो बेहतर है के तुम एक ही निकाह करो

मुसलमान तीन तलाक में बदलाव क्यों नहीं चाहते – Musalman Aur Teen Talaaq Hindi

आइये अब जानते है मुस्लमान तीन तलाक में बदलाव क्यों नहीं चाहते है:-

  • तीन तलाक एक इस्लामिक हुक्म है जिसे न मानने का सवाल ही नहीं उठता.
  • अगर तीन तलाक को खत्म कर दिया जाये तो तीन तलाक के बाद जब पति-पत्नी साथ रहेंगे तो दुनिया के कानून से तो वह पति-पत्नी होंगे लेकिन इस्लाम के अनुसार वह एक दूसरे के लिए अजनबी होंगे और उनका हर काम हराम होगा, उनका एक दूसरे को छूना हराम, एक दूसरे से सम्भोग करना जिना और जो बच्चे तीन तलाक के बाद होंगे वह हरामी कहलायेंगे।
  • तीन तलाक के बंद होने से किसी का कोई फायदा नहीं होगा क्योंकि जिसको अपनी पत्नी को छोड़ना है वह तो छोड़ ही देगा जैसे हमारे माननीय प्रधानमंत्री जी (इन्हें तो तलाक की ज़रूरत भी नहीं पड़ी).
  • तीन तलाक के बंद करने से सिर्फ गुनाह होंगे कोई फायदा नहीं।
  • तीन तलाक का मुद्दा सिर्फ और सिर्फ राजनीतिक फायदे के लिए उठाया गया मुद्दा है औरतों के अधिकारों से इसका कोई लेना देना नही है.
  • तीन तलाक से किसी महिला के किसी भी अधिकार का उल्लंघन नहीं है क्योंकि जब तलाक हो जाती है तो पति – पत्नी अलग हो जाते है चाहे एक तलाक दी हो या तीन. ऐसा नहीं है की तीन तलाक से उनमे से किसी एक की ज़िन्दगी खत्म हो जाती है।

शायरा बानो ने तीन तलाक को भारतीय संविधान में नागरिकों को दिए गए मूलभूत अधिकारों अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) के विरुद्ध करार दिया है, ये बिलकुल गलत है अगर मर्द को तलाक का अधिकार है तो औरतों को भी तलाक लेने का अधिकार दिया गया है जिसे “खुला” कहते है. यहाँ मैं एक बात कहना चाहूंगा की जो लोग इसको समानता से जोड़कर देखते है वह उस समय कहाँ चले जाते है जब एक महिला अपने पति पर मेंटेनेन्स के लिए केस चलाती है? अगर समानता हर चीज़ में है तो फिर पति के ऊपर पत्नी का भरण पोषण करने का दायित्व क्यों रखा गया, दोनों अपना अलग अलग भरण पोषण करे या पत्नी और पति दोनों मिलकर एक दूसरे का भरण पोषण करे, सिर्फ पति ही भरण पोषण करने का ज़िम्मेदार क्यूँ??

Malik Mehrose
Malik Mehrose is a young entrepreneur, author, blogger, and self-taught developer from Jammu and Kashmir. He is the founder and CEO of SHOPYLL, His startup "SHOPYLL" has emerged a new shine to e-commerce business in Jammu and Kashmir, with a vision to boost the e-commerce ecosystem and to uplift industrialization in Jammu and Kashmir.