जानिए भारतीय उत्तराधिकार कानून – Learn Indian Succession Act Hindi Guide

Learn Indian Succession Act Hindi Guide – उत्तराधिकार कानून के तहत अगर किसी व्यक्ति ने वसीयत नहीं की है तो उसके मरने के बाद उसकी संपत्ति किसे मिलेगी। हालांकि अलग-अलग धार्मिक समुदायों के उत्तराधिकार के लिए अलग-अलग कानून हैं ।

Learn Indian Succession Act Hindi Guide

हिंदुओं को उत्तराधिकार – Hindu Succession

  • 1-किसी हिंदू की मृत्यु होने पर उसकी संपत्ति उसकी विधवा , बच्चों(लड़के तथा लड़कियां) तथा मां के बीच बराबर बांटी जाती है ।
  • 2-अगर उसके किसी पुत्र की उससे पहले मृत्यु हो गयी हो तो बेटे की विधवा तथा बच्चों को संपत्ति का एक हिस्सा मिलेगा।
  • 3-उच्चतम न्यायालय ने व्यवस्था दी है कि किसी हिंदू पुरुष द्वारा पत्नी के जीवित रहते दूसरी शादी कर लेने से दूसरी पत्नी को उत्तराधिकार नहीं मिलता है , लेकिन उसके बच्चों का पहली पत्नी के बच्चों की तरह ही अधिकार होता है ।
  • 4-हिंदू महिला की संपत्ति उसके बच्चों (लड़के तथा लड़कियां ) तथा पति को मिलेगी । उससे पहले मरने वाले बेटे के बच्चों को भी बराबर का एक हिस्सा मिलेगा ।
  • 5-अगर किसी हिंदू व्यक्ति के परिवार के नजदीकी सदस्य जीवित नहीं हैं, तो उसकी मृत्यु के बाद उसकी संपत्ति पाने वाले उत्तराधिकारियों का निश्चित वर्गीकरण होता है ।

एक हिंदू पुरूष के संपत्ति के उत्तराधिकारी उसके निम्नलिखित रिश्तेदार हो सकते है-

पुत्र, पुत्री, विधवा मां, मृतक पुत्र का पुत्र, मृतक पुत्र की पुत्री, मृतक पुत्री के बेटा-बेटी, मृतक बेटे की विधवा, मृतक बेटे के बेटे का बेटा, मृतक बेटे के बेटे की विधवा, मृतक बेटे के मृतक बेटे की बेटी.

मुसलमानों (शिया और सुन्नी) को उत्तराधिकार – Muslim (Sunni/Shia) Succession 

शिया और सुन्नियों के लिए अलग-अलग नियम हैं। लेकिन निम्नलिखित सामान्य नियम दोनों पर लागू होते हैं

  • 1-अंतिम संस्कार के खर्च और ऋणों के भुगतान के बाद बची संपत्ति का केवल एक तिहाई वसीयत के रुप में दिया जा सकता है ।
  • 2-पुरुष वारिस को महिला वारिस से दोगुना हिस्सा मिलता है ।
  • 3-वंश-परंपरा में (जैसे पुत्र-पोता) नजदीकी रिश्ते (पुत्र) के होने पर दूर के रिश्ते (पोते) को हिस्सा नहीं मिलता है ।

ईसाइयों को उत्तराधिकार – Christian Succession 

भारतीय ईसाइयों को उत्तराधिकार में मिलने वाली संपत्ति का निर्धारण उत्तराधिकार कानून के तहत होता है । विशेष विवाह कानून के तहत विवाह करने वाले तथा भारत में रहने वाले यूरोपीय, एंग्लो इंडियन तथा यहूदी भी इसी कानून के तहत आते हैं ।

  • 1-विधवा को एक तिहाई संपत्ति पाने का हक है । बाकी दो तिहाई मृतक की सीधी वंश परंपरा के उत्तराधिकारियों को मिलता है।
  • 2-बेटे और बेटियों को बराबर का हिस्सा मिलता है ।
  • 3-पिता की मृत्यु से पहले मर जाने वाले बेटे की संतानों को उसे बेटे का हिस्सा मिल जाता है ।
  • 4-अगर केवल विधवा जीवित हो तो उसे आधी संपत्ति मिलती है  और आधी मृतक के पिता को मिल जाती है ।
  • 5-अगर पिता जिंदा ना हो तो यह हिस्सा मां, भाइयों तथा बहनों को मिल जाता है ।
  • 6-किसी महिला की संपत्ति का भी इसी तरह बंटवारा होता है

पारसियों को उत्तराधिकार – Parsi Succession

  • 1-पारसियों में पुरुष की संपत्ति उसकी विधवा , बच्चों तथा माता-पिता में बंटती है ।
  • 2-लड़के तथा विधवा को लड़की से दोगुना हिस्सा मिलता है ।
  • 3-पिता को पोते के हिस्से का आधा तथा माता को पोती के हिस्से का आधा मिलता है ।
  • 4-किसी महिला की संपत्ति उसके पति और बच्चों में बराबर-बराबर बंटती हिस्सों में बंटती है ।
  • 5-पति की संपत्ति के बंटवारे के समय उसमें पत्नी की निजी संपत्ति नहीं जोड़ी जाती है ।
  • 6-पत्नी को अपनी संपत्ति पर पूरा अधिकार है । उसकी संपत्ति में उसकी आय, निजी साज-सामान तथा विवाह के समय मिले उपहार शामिल हैं ।
  • 7-शादी के समय दुल्हन को मिले उपहार और भेंट स्त्रीधन के तहत आते हैं ।
  • 8-उच्चतम न्यायालय ने अपने एक फैसले में स्पष्ट किया है कि हिंदू विवाह कानून की धारा 27 के तहत स्त्रीधन पर पूर्ण अधिकार पत्नी का होता है और उसे इस अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता है ।

नोट- किसी फंड या बीमा पॉलिसी में नामांकन हो जाने से नामांकित व्यक्ति के नाम संपत्ति हस्तांतरित नहीं हो जाती है ।वह तो किसी की मृत्यु के बाद इन रकमों का केवल ट्रस्टी है ।

वसीयत में शामिल संपत्ति – The property will include

  • खुद की कमाई हुई चल संपत्ति, जैसे कैश, घरेलू सामान, गहने, बैंक में जमा रकम, पीएफ, शेयर्स, किसी कंपनी की हिस्सेदारी।
  • खुद की कमाई हुई अचल संपत्ति, जैसे जमीन, मकान, दुकान, खेत आदि।
  • पुरखों से मिली कोई भी चल या अचल संपत्ति, जो आपके नाम है।

इसे भी जाने – It will also

  1. मुसलमानों के अलावा हर समुदाय के लिए भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम 1925 में वसीयत का कानून है। मुसलमान अपने निजी कानून से नियंत्रित होते हैं ।
  2. हिंदुओ और मुसलमानों को छोंड़कर अन्य समुदायों के लोगों को विवाह के बाद नई वसीयत करनी पड़ती है , क्योंकि विवाह के बाद पुरानी वसीयत निष्प्रभावी हो जाती है ।
  3. अगर व्यक्ति विवाह के बाद नई वसीयत नहीं करता है , तो संपत्ति उत्तराधिकार कानून के अनुसार बांटी जाती है ।
  4. नई वसीयत करते समय उल्लेख करना होता है कि पुरानी वसीयत रद्द की जा रही है ।
  5. अगर संपत्ति साझा नामों में हो , तो भी व्यक्ति अपने हिस्से के बारे में वसीयत कर सकता है ।
  6. वसीयत करने वाले व्यक्ति को दस्तावेज पर हस्ताक्षर करने चाहिए अथवा अपना अंगूठा लगाना चाहिए।
  7. दो गवाहों द्वारा वसीयत सत्यापित की जानी चाहिए।
  8. वसीयत के अनुसार जिन्हें लाभ मिलना है , वे तथा उनके पति/पत्नियां, वसीयत के गवाह नहीं होने चाहिए।
  9. अगर वे ऐसी वसीयत पर गवाही देते हैं, तो वसीयत के अनुसार मिलने वाले लाभ या संपत्ति उन्हें नहीं मिलेंगे, लेकिन वसीयत अमान्य नहीं होगी ।
  10. वसीयत को पंजीकृत अवश्य करा लेना चाहिए ताकि इसकी सत्यता पर विवाद ना हो, इसके खोने की आशंका ना रहे अथवा इसके तथ्यों में कोई फेरबदल ना कर सके।
  11. मुसलमान जुबानी वसीयत कर सकता है । अगर उसके वारिस सहमत नहीं हों तो वह अपनी एक तिहाई से ज्यादा संपत्ति (अंतिम संस्कार के खर्च तथा कर्जों के भुगतान के बाद बची संपत्ति का एक तिहाई) का वसीयत के जरिए निपटारा नहीं कर सकता।
  12. मुसलमान की वसीयत अगर लिखी हुई है तो उसे प्रमाणित करने की जरुरत नहीं है । वह हस्ताक्षर के बिना भी वैध है।लेकिन अगर उसके वसीयतकर्ता के बारे में साबित कर दिया जाय।
  13. किसी अभियान या युद्ध के दौरान सैनिक या वायुसैनिक ‘खास वसीयत’ कर सकता है । इसे विशेषाधिकार वसीयत भी कहते हैं।
  14. खास वसीयत का अधिकार हिंदुओं को नहीं प्राप्त है।

संपत्ति का उत्तराधिकार – Inheritance of properties

  • खास वसीयत लिखित या कुछ सीमाओं तक मौखिक हो सकती है।
  • खास वसीयत अगर किसी अन्य व्यक्ति ने लिखा है तो सैनिक के हस्ताक्षर होने चाहिए।लेकिन अगर उसके निर्देश पर लिखा गया है तो हस्ताक्षर की जरुरत नहीं होती है ।
  • कोई सैनिक दो गवाहों की उपस्थिति में मौखिक वसीयत कर सकता है । लेकिन खास वसीयत का अधिकार ना रहने पर वसीयत एक महीने के बाद खत्म हो जाती है ।
  • नाबालिग या पागल व्यक्ति को छोड़कर कोई भी व्यक्ति वसीयत कर सकता है ।
  • अगर वसीयतकर्ता ने इसे लागू करने वाले का नाम नहीं दिया है या लागू करने वाला अपनी भूमिका को तैयार नहीं है तो वसीयतकर्ता के उत्तराधिकारी अदालत में आवेदन कर सकते हैं कि उन्हीं में से किसी को वसीयत लागू करने वाला नियुक्त कर दिया जाय।
  • अगर न्यायालय द्वारा नियुक्त व्यक्ति (निष्पादक,executor)अपना कार्य नहीं करता है, तो उत्तराधिकारी न्यायालय से वसीयत लागू करवाने का प्रशासन पत्र हासिल कर सकते हैं ।
  • वसीयत लागू करने वाले को अदालत से वसीयत पर प्रोबेट(न्यायालय द्वारा जारी की गयी वसीयत की प्रामाणिक कापी) अर्थात प्रमाणपत्र हासिल करना चाहिए।
  • किसी विवाद की स्थिति में संपत्ति पर अपने कानूनी अधिकार के दावे के लिए , लाभ पाने के इच्छुक वारिस के पास प्रोबेट या प्रशासन पत्र होना जरुरी है ।
  • वसीयतकर्ता जब भी अपनी संपत्ति को बांटना चाहे वह वसीयत में परिवर्तन कर सकता है या उसे पलट सकता है ।
  • अगर वसीयतदार, वसीयतकर्ता से पहले मर जाता है तो वसीयत खत्म हो जाती है और संपत्ति वसीयतकर्ता के उत्तराधिकारियों को मिलती है ।
  • अगर दुर्घटना में वसीयतकर्ता और वसीयत पाने वाले की एक साथ मौत हो जाती है, तो वसीयत समाप्त हो जाती है ।
  • अगर दो वसीयत पाने वालों में से एक की मौत हो जाती है तो जिंदा व्यक्ति पूरी संपत्ति मिल जाती है ।
  • अगर वसीयत करने वाले से पहले किसी गवाह की मौत हो जाए तो वसीयत दोबारा बनवानी चाहिए। दोबारा वसीयत बनवाते समय पहली वसीयत को कैंसल करने का जिक्र जरूर करें।
  • वसीयत अगर खो जाए तो भी दोबारा वसीयत करवाएं और बेहतर है कि उसमें थोड़ा फेरबदल करें, ताकि पहली वसीयत कैंसल मान ली जाए।
  • अगर वसीयत करने वाले की मौत और गवाह की मौत एक साथ हो जाए तो वसीयत करने वाले की और गवाह की हैंडराइटिंग ही उसका सबूत है। ऐसे में किसी ऐसे शख्स की तलाश करनी चाहिए, जो तीनों की हैंडराइटिंग पहचानता हो या तीनों के दस्तखत पहचानता हो।
  • वसीयत किसी भी भाषा में कर सकते हैं।
  • स्टांप ड्यूटी अनिवार्य नहीं है।
  • वसीयत करवाने की पूरी प्रक्रिया की विडियो रेकॉर्डिंग कराना अच्छा रहता है। वैसे, कानूनन यह जरूरी नहीं है।

वसीयतनामा जमा करने की सुविधा – Testament to deposit facility

  • भारतीय पंजीकरण अधिनियम 1908 के अंतर्गत रजिस्ट्रर के नाम वसीयतनामा जमा किया जाता है ।
  • वसीयतनामा रजिस्टर कराना या जमा करना अनिवार्य नहीं है ।
  • वसीयतनामा जमा कराने के लिए रजिस्ट्रार उसका कवर नहीं खोलता है । सब औपचारिकताओं के बाद उसे जमा कर लेता है ।
  • जबकि पंजीकरण में जो व्यक्ति दस्तावेज प्रस्तुत करता है , सब रजिस्ट्रार उसकी कॉपी कर , उसी व्यक्ति को वापस लौटा देता है।

वसीयत तैयार करने की प्रक्रिया – Preparation process will

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वसीयत की योजना बना लेने के बाद आप अपनी वसीयत को सरल, सुनिश्चित तथा स्पष्ट भाषा में लिख सकते हैं। भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम, 1925 की धारा 74 के अनुसार “ अनिश्चितता के कारण वसीयत अमान्य होती है। एक ऐसी वसीयत जिसमें सुनिश्चित रुप से आशय को अभिव्यक्त नहीं किया जाता है तो वह अनिश्चितता के कारण अमान्य होती है।”

यदि आपको सलाह की आवश्यकता है तो आप किसी योग्य पेशेवर, आमतौर पर वकील से त्रुटि रहित दस्तावेज तैयार करने के लिए सम्पर्क कर सकते हैं। यह सुनिश्चित करने के लिए कि आपकी वसीयत कानून के अनुसार वैध तथा इसमें सभी आकस्मिकताओं को शामिल किया गया है।

18वर्ष से उपर के दो व्यक्ति आपकी वसीयत के साक्षी होने चाहिए। इन दोनो में से एक साक्षी को आपके प्रोबेट आवेदन पत्र पर हस्ताक्षर करने होंगे तथा इस बात की पुष्टि की आपने वसीयत पर हस्ताक्षर किए हैं, संभवत इस बात का सत्यापन संबंधित न्यायालय में करना होगा। इसलिए, आपके हस्ताक्षर तथा दो साक्षियों के हस्ताक्षर (आपके हस्ताक्षर का सत्यापन करने के लिए किए गए हस्ताक्षर कहा जाता है) एक ही सत्र में पूरे किए जाने चाहिए, तथा आप सभी एक ही समय तथा तारीख में एक ही कमरे में होने चाहिए। प्रत्येक साक्षा के हस्ताक्षर के नीचे, उनका पूरा नाम, आयु, वर्तमान पता तथा पेशा स्पष्ट रुप से उल्लिखित होना चाहिए।

ऐसा कोई व्यक्ति जिसे वसीयत से लाभ होगा अथवा उसका पति/पत्नी सत्यापन करने वाला साक्षी नहीं हो सकता है। यदि ऐसा होता है तो भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम, 1925 की धारा 67 के अनुसार आपकी वसीयत अन्य वसीयतदारों के लिए वैध होगी, लेकिन आपकी वसीयत ऐसे संबंधित व्यक्ति/व्यक्तियों (सत्यापनकारी साक्षी को दिया गया उपहार अथवा प्रस्तावित लाभग्राही/लाभग्राहियों की सत्यापन करने वाला पति/पत्नी) के संदर्भ में मान्य नहीं होगी।

रजिस्ट्रार अथवा उप-रजिस्ट्रार के यहां पर अपनी वसीयत का पंजीकरण करवाना वैकल्पिक होता है लेकिन ऐसा करना लाभदायक होता है। पंजीकरण करवाने से वसीयत प्रमाणिक हो जाती है। कभी कभी बैंकों तथा भिन्न भिन्न प्राधिकरणों में पजीकृत वसीयत की मांग की जाती है। आपको तथा आपकी वसीयत पर हस्ताक्षर करने वाले व्यक्तियों को वसीयत की दो मूल हस्ताक्षरित प्रतियों, दो फोटो तथा पहचान के साक्ष्य के साथ रजिस्ट्रार के कार्यालय में जाना होगा। बहुत कम शुल्क की अदायगी करने पर वसीयत का पंजीकरण करवाया जा सकता है तथा इसमें अधिक समय नहीं लगता है ।

वसीयत के अन्य तरीके – Other ways of Will

  • आप अपनी जायदाद की वसीयत एक ट्रस्ट के नाम भी कर सकते हैं। फायदा यह है कि इसमें डेढ़ लाख रुपये तक की रिबेट टैक्स में मिल जाती है। ट्रस्ट बनाते वक्त यह साफ करना होता है कि कौन ट्रस्टी है और कौन वारिस। ट्रस्ट के नाम वसीयत को कैंसल भी किया जा सकता है और बदला भी जा सकता है। ट्रस्ट के ट्रस्टी संपत्ति की देखभाल करेंगे और जो इनकम होगी, वह वारिसों को मिलेगी। याद रखें वारिस ट्रस्टी नहीं हो सकते।
  • अगर कोई व्यक्ति मरते समय भी अपनी जायदाद की जुबानी घोषणा कर दे, तो भी आपसी सूझ-बूझ से जायदाद के हकदार बंटवारा कर सकते हैं। कानून को इसमें कोई ऐतराज नहीं होगा। कानून तब आड़े आता है, जब किसी भी प्रकार की वसीयत पर विवाद हो।

Malik Mehrose
Malik Mehrose is a young entrepreneur, author, blogger, and self-taught developer from Jammu and Kashmir. He is the founder and CEO of SHOPYLL, His startup "SHOPYLL" has emerged a new shine to e-commerce business in Jammu and Kashmir, with a vision to boost the e-commerce ecosystem and to uplift industrialization in Jammu and Kashmir.