इस्लाम में औरत और पर्दा – Islam me Aurat Aur Parda in Hindi

इस्लाम में औरत और पर्दा – Islam me Aurat Aur Parda in Hindi

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एक नज़र पर्दे पर :-

पर्दा एक इस्लामी शब्द है जो अरबी भाषा में फारसी भाषा से आया। इसका अर्थ होता है “ढकना” या “अलग करना”। पर्दा प्रथा का एक पहलू है बुर्क़ा का चलन। बुर्का एक तरह का घूँघट है जो मुस्लिम समुदाय की महिलाएँ और लड़कियाँ कुछ खास जगहों पर खुद को पुरुषों की निगाह से अलग/दूर रखने के लिये इस्तेमाल करती हैं।

भारत में हिन्दुओं में पर्दा प्रथा इसलाम की देन है। इस्लाम के प्रभाव से तथा इस्लामी आक्रमण के समय लुच्चों से बचाव के लिये हिन्दू स्त्रियाँ भी परदा करने लगीं। यह प्रथा मुग़ल शासकों के दौरान अपनी जड़े काफी मज़बूत की। वैसे इस प्रथा की शुरुआत भारत मेँ12वीँ सदी मेँ मानी जाती है। इसका ज्यादातर विस्तार राजस्थान के राजपुत जाति मेँ था। 20वीँ सदी के उतरार्द्ध मेँ इस प्रथा के विरोध के फलस्वरुप इसमेँ कमी आई है।

Islam me Aurat Aur Parda in Hindi – इस्लाम में औरतों की जो स्थिति है, उसपर सेक्यूलर मीडिया का ज़बरदस्त हमला होता है। वे पर्दे और इस्लामी लिबास को इस्लामी क़ानून में स्त्रियों की दासता के तर्क के रूप में पेश करते हैं। इससे पहले कि हम पर्दे के धार्मिक निर्देश के पीछे मौजूद कारणों पर विचार करें, इस्लाम से पूर्व समाज में स्त्रियों की स्थिति का अध्ययन करते हैं:-

♠1. भूतकाल में स्त्रियों का अपमान किया जाता और उनका प्रयोग केवल काम-वासना के लिए किया जाता था। इतिहास से लिए गए निम्न उदाहरण इस तथ्य की पूर्ण रूप से व्याख्या करते हैं कि आदिकाल की सभ्यता में औरतों का स्थान इस सीमा तक गिरा हुआ था कि उनको प्राथमिक मानव सम्मान तक नहीं दिया जाता था—

(A) बेबिलोनिया सभ्यता –
औरतें अपमानित की जातीं थीं, और बेबिलोनिया के क़ानून में उनको हर हक़ और अधिकार से वंचित रखा जाता था। यदि एक व्यक्ति किसी औरत की हत्या कर देता तो उसको दंड देने के बजाय उसकी पत्नी को मौत के घाट उतार दिया जाता था।

(B) यूनानी सभ्यता –
इस सभ्यता को प्राचीन सभ्यताओं में अत्यन्त श्रेष्ठ माना जाता है। इस ‘अत्यंत श्रेष्ठ’ व्यवस्था के अनुसार औरतों को सभी अधिकारों से वंचित रखा जाता था और वे नीच वस्तु के रूप में देखी जाती थीं। यूनानी देवगाथा में ‘‘पांडोरा’’ नाम की एक काल्पनिक स्त्री पूरी मानवजाति के दुखों की जड़ मानी जाती है। यूनानी लोग स्त्रियों को पुरुषों के मुक़ाबले में तुच्छ जाति मानते थे।
यद्यपि उनकी पवित्रता अमूल्य थी और उनका सम्मान किया जाता था, परंतु बाद में यूनानी लोग अहंकार और काम-वासना में लिप्त हो गए। वैश्यावृति यूनानी समाज के हर वर्ग में एक आम रिवाज बन गई।

(C) रोमन सभ्यता –
जब रोमन सभ्यता अपने गौरव की चरमसीमा पर थी, उस समय एक पुरुष को अपनी पत्नी का जीवन छीनने का भी अधिकार था। वैश्यावृति और नग्नता रोमवासियों में आम थी।

(D) मिस्री सभ्यता –
मिस्री लोग स्त्रियों को शैतान का रूप मानते थे।

(E) इस्लाम से पहले का अरब –
इस्लाम से पहले अरब में औरतों को नीच माना जाता और किसी लड़की का जन्म होता तो कभी-कभी उसे जीवित दफ़न कर दिया जाता था।

♠2. इस्लाम में पर्दे का महत्त्व – Islam me parde ka mukaam
इस्लाम ने औरतों को ऊपर उठाया और उनको बराबरी का दर्जा दिया और वह उनसे अपेक्षा करता है कि वे अपना स्तर बनाए रखें! लगभग 1400 साल पहले ही उनके अधिकार उनको दे दिए और वह उनसे अपेक्षा करता है कि वे अपने स्तर को बनाए रखेंगी।

पुरुषों के लिए पर्दा – आमतौर पर लोग यह समझते हैं कि पर्दे का संबंध केवल स्त्रियों से है। हालांकि पवित्र क़ुरआन में अल्लाह ने औरतों से पहले मर्दों केपर्दे का वर्णन किया है —
‘‘ऐ नबी (सलल्लाहो अलैहि वसल्लम)! ईमान वालों से कह दो कि वे अपनी नज़रें नीची रखें और अपनी पाकदामिनी (शील) की सुरक्षा करें। यह उनको अधिक पवित्र बनाएगा और अल्लाह ख़ूब जानता है हर उस काम को जो वे करते हैं।’’ – (क़ुरआन, 24:30)
उस क्षण जब एक व्यक्ति की नज़र किसी स्त्री पर पड़े तो उसे चाहिए कि वह अपनी नज़र नीची कर ले।

  • स्त्रियों के लिए पर्दाक़ुरआन की सूरा नूर में कहा गया है —
    ‘‘ऐ नबी (सलल्लाहो अलैहि वसल्लम)! और अल्लाह पर ईमान रखने वाली औरतों से कह दो कि वे अपनी नज़रें नीची रखें और अपनी पाकदामिनी (शील) की सुरक्षा करें और वे अपने बनाव-श्रृंगार और आभूषणों को न दिखाएँ, इसमें कोई आपत्ति नहीं जो सामान्य रूप से ज़ाहिर हो जाए। और उन्हें चाहिए कि वे अपने सीनों पर ओढ़नियाँ ओढ़ लें और अपने पतियों, बापों, अपने बेटों….के अतिरिक्त किसी के सामने अपने बनाव-श्रृंगार प्रकट न करें।’’ –(क़ुरआन, 24:31)

♠3. पर्दे के लिए आवश्यक शर्तें –
पवित्र क़ुरआन और हदीस (पैग़म्बर के कथन) के अनुसार पर्दे के लिए निम्नलिखित छह बातों का ध्यान देना आवश्यक है —

  • (i) पहला शरीर का पर्दा है जिसे ढका जाना चाहिए। यह पुरुष और स्त्री के लिए भिन्न है। पुरुष के लिए नाभि (Navel) से लेकर घुटनों तक ढकना आवश्यक है और स्त्री के लिए चेहरे और हाथों की कलाई को छोड़कर पूरे शरीर को ढकना आवश्यक है। यद्यपि वे चाहें तो खुले हिस्से को भी छिपा सकती हैं। इस्लाम के कुछ आलिम इस बात पर ज़ोर देते हैं कि चेहरा और हाथ भी पर्दे का आवश्यक हिस्सा है। अन्य बातें ऐसी हैं जो स्त्री एवं पुरुष के लिए समान हैं।
  • (ii) धारण किया गया वस्त्र ढीला हो और शरीर के अंगों को प्रकट न करे।
  • (iii) धारण किया गया वस्त्र पारदर्शी न हो कि कोई शरीर के भीतरी हिस्से को देख सके।
  • (iv) पहना हुआ वस्त्र ऐसा भड़कीला न हो कि विपरीत लिंग को आकर्षित या उत्तेजित करे।
  • (v) पहना हुआ वस्त्र विपरीत लिंग के वस्त्रों की तरह न हो।
  • (vi) धारण किया गया वस्त्र ऐसा नहीं होना चाहिए जो किसी विशेष ग़ैर-मुस्लिम धर्म को चिंहित करता हो और उस धर्म का प्रतीक हो।

♠4. पर्दा इंसान के व्यवहार और आचरण का भी पता देता है –
पर्दा दूसरी चीज़ों के साथ-साथ इंसान के व्यवहार और आचरण का भी पता देता है पूर्ण पर्दा, वस्त्र (लिबास) की छह कसौटियों के अलावा नैतिक व्यवहार और आचरण को भी अपने भीतर समोए हुए है। कोई व्यक्ति यदि केवल वस्त्र की कसौटियों को अपनाता है तो वह पर्दे के सीमित अर्थ का पालन कर रहा है। वस्त्र के द्वारा पर्दे के साथ-साथ आँखों और विचारों का भी पर्दा करना चाहिए। किसी व्यक्ति के चाल-चलन, बातचीत एवं व्यवहार को भी पर्दे के दायरे में लिया जाता है।

♠5. पर्दा दुर्व्यवहार से रोकता है –
पर्दे का औरतों को क्यों उपदेश दिया जाता है इसके कारण का पवित्र क़ुरआन की सूरा अल अहज़ाब में उल्लेख किया गया है —
‘‘ऐ नबी! अपनी पत्नियों, पुत्रियों और ईमान वाली स्त्रियों से कह दो कि वे (जब बाहर जाएँ) तो ऊपरी वस्त्र से स्वयं को ढाँक लें। यह अत्यन्त आसान है कि वे इसी प्रकार जानी जाएँ और दुर्व्यवहार से सुरक्षित रहें और अल्लाह तो बड़ा क्षमाकारी और बड़ा ही दयालु है।’’ – (क़ुरआन, 33:59)
पवित्र क़ुरआन कहता है कि औरतों को पर्दे का इसलिए उपदेश दिया गया है कि वे पाक-दामिनी के रूप में देखी जाएँ और पर्दा उनसे दुर्व्यवहार और दुराचरण को भी रोकता है।

♠6. जुड़वाँ बहनों का उदाहरण –
मान लीजिए कि समान रूप से सुन्दर दो जुड़वाँ बहनें सड़क पर चल रही हैं। एक केवल कलाई और चेहरे को छोड़कर पर्दे में पूरी तरह ढकी हो और दूसरी पश्चिमी वस्त्र मिनी स्कर्ट (छोटा लंहगा) और ब्लाऊज पहने हुए हो। एक लफंगा किसी लड़की को छेड़ने के लिए किनारे खड़ा हो तो ऐसी स्थिति में वह किससे छेड़छाड़ करेगा। उस लड़की से जो पर्दे में है या उस लड़की को जो मिनी स्कर्ट पहने है?
स्वाभाविक रूप से वह दूसरी लड़की से दुर्व्यवहार करेगा। ऐसे वस्त्र विपरीत लिंग को अप्रत्यक्ष रूप से छेड़छाड़ और दुर्व्यवहार का निमंत्रण (Provocation, invitation) देते हैं। क़ुरआन बिल्कुल सही कहता है कि पर्दा औरतों के साथ छेड़छाड़ और उत्पीड़न को रोकता है।

♠7. बलात्कारियों के लिए मौत की सज़ा –
इस्लामी क़ानून में बलात्कार की सज़ा मौत है। बहुत से लोग इसे निर्दयता कहकर इस दंड पर आश्चर्य प्रकट करते हैं। कुछ का तो कहना है कि इस्लाम एक जंगली धर्म है। एक सरल-सा प्रश्न गै़र-मुस्लिमों से किया गया कि ईश्वर न करे कि कोई आपकी माँ अथवा बहन के साथ बलात्कार करता है और आप को न्यायाधीश बना दिया जाए और बलात्कारी को आपके सामने लाया जाए तो उस दोषी को आप कौनसी सज़ा सुनाएँगे?

प्रत्येक से एक ही उत्तर मिला कि मृत्यु-दंड दिया जाएगा। कुछ ने कहा कि वे उसे कष्ट दे-देकर मारने की सज़ा सुनाएँगे।
अगला प्रश्न किया गया कि यदि कोई आपकी माँ, पत्नी अथवा बहन के साथ बलात्कार करता है तो आप उसे मृत्यु-दंड देना चाहते हैं परंतु यही घटना किसी दूसरे की माँ, पत्नी अथवा बहन के साथ होती है तो आप कहते हैं कि मृत्यु-दंड देना जंगलीपन है। इस स्थिति में यह दोहरा मापदंड क्यों है?

♠8. पश्चिमी समाज के झूटे दावे –

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पश्चिमी समाज औरतों को ऊपर उठाने का झूठा दावा करता है औरतों की आज़ादी का पश्चिमी दावा एक ढोंग है, जिसके सहारे वे उनके शरीर का शोषण करते हैं, उनकी आत्मा को गंदा करते हैं और उनके मान-सम्मान से उनको वंचित रखते हैं। पश्चिमी समाज दावा करता है कि उसने औरतों को ऊपर उठाया। इसके विपरीत उन्होंने उनको रखैल और समाज की तितलियों का स्थान दिया है, जो केवल उन जिस्मफ़रोशों और काम-इच्छुकों के हाथों का एक खिलौना हैं, जो कला और संस्कृति के रंग-बिरंगे पर्दे के पीछे छिपे हुए हैं।

♠9. अमेरिका में बलात्कार की संख्या सबसे अधिक 
अमेरिका में बलात्कार की दर सबसे अधिक है अमेरिका को दुनिया का सबसे उन्नत देश समझा जाता है। 1990 ई॰ की FBI रिपोर्ट से पता चलता है कि अमेरिका में उस साल 1,02,555 बलात्कार की घटनाएँ दर्ज की गईं। रिपोर्ट में यह बात भी बताई गई है कि इस तरह की कुल घटनाओं में से केवल 16 प्रतिशत ही प्रकाश में आ सकी हैं। इस प्रकार 1990 ई॰ में बलात्कार की घटना का सही अंदाज़ा लगाने के लिए उपरोक्त संख्या को 6.25 से गुना करके जो योग सामने आता है वह 6,40,968 है। अगर इस पूरी संख्या को साल के 365 दिनों में बाँटा जाए तो प्रतिदिन के लिहाज से 1756 की संख्या सामने आती है।

एक दूसरी रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका में प्रतिदिन 1900 बलात्कार की घटनाएँ पेश आती हैं। National Crime Victimization Survey Bureau of Justice Statistics (U.S.Deptt.Of Justice) के अनुसार केवल 1996 में 3,07,000 घटनाएँ दर्ज हुईं। लेकिन सही घटनाओं की केवल 31 प्रतिशत घटना ही दर्ज हुईं। इस प्रकार 3,07,000-3,226 = 9,90,322 बलात्कार की घटनाएँ सन् 1996 ई॰ में दर्ज हुईं। प्रतिदिन के लिहाज से औसत 2713 बलात्कार की घटनाएँ 1996 ई॰ में अमेरिका में हुईं। ज़रा विचार करें कि अमेरिका में हर 32 सेकेंड में एक बलात्कार होता है।

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ऐसा लगता है कि अमेरिकी बलात्कारी बड़े ही निडर हैं। FBI की 1990 ई॰ की रिपोर्ट आगे बताती है कि बलात्कार की घटनाओं में केवल 10 प्रतिशत बलात्कारी ही गिरफ़्तार किए जा सके हैं। जो कुल संख्या का 1.6 प्रतिशत है। बलात्कारियों में से 50 प्रतिशत लोगों को मुक़द्दमा से पहले रिहा कर दिया गया। इसका मतलब यह हुआ कि केवल 0.8 प्रतिशत बलात्कारियों के विरुद्ध ही मुक़द्दमा चलाया जा सका। दूसरे शब्दों में अगर एक व्यक्ति 125 बार बलात्कार की घटनाओं में लिप्त हो तो केवल एक बार ही उसे सज़ा दी जाने की संभावना है। बहुत से लोग इसे एक अच्छा जुआ समझेंगे। रिपोर्ट से यह भी अंदाज़ा होता है कि सज़ा दिए जाने वालों में से केवल 50 प्रतिशत लोगों को एक साल से कम की सज़ा दी गई है।

*हालाँकि अमेरिकी क़ानून के अनुसार सात साल की सज़ा होनी चाहिए। उन लोगों के संबंध में जो पहली बार बलात्कार के दोषी पाए गए हैं, जज नर्म पड़ जाते हैं। ज़रा विचार करें कि एक व्यक्ति 125 बार बलात्कार करता है लेकिन उसके विरुद्ध मुक़द्दमा किए जाने का अवसर केवल एक बार ही आता है और फिर 50 प्रतिशत लोगों को जज की नर्मी का लाभ मिल जाता है और एक साल से भी कम मुद्दत की सज़ा किसी ऐसे बलात्कारी को मिल पाती है जिस पर यह अपराध सिद्ध हो चुका है।

*उस दृश्य की कल्पना कीजिए कि अगर अमेरिका में पर्दे का पालन किया जाता। जब कभी कोई व्यक्ति एक स्त्री पर नज़र डालता और कोई अशुद्ध विचार उसके मस्तिष्क में उभरता तो वह अपनी नज़र नीची कर लेता। प्रत्येक स्त्री पर्दा करती अर्था्त पूरे शरीर को ढक लेती सिवाय कलाई और चेहरे के। इसके बाद यदि कोई उसके साथ बलात्कार करता तो उसे मृत्यु-दंड दिया जाता। ऐसी स्थिति में क्या अमेरिका में बलात्कार की दर बढ़ती या स्थिर रहती या कम होती?

♠10. इस्लामी क़ानून निश्चित रूप से बलात्कार की दर घटाएगा –
स्वाभाविक रूप से जब भी इस्लामी सभ्यता क़ायम होगी, और इस्लामी क़ानून लागू किया जाएगा तो इसका परिणाम निश्चित रूप से सकारात्मक होगा। यदि इस्लामी क़ानून संसार के किसी भी हिस्से में लागू किया जाए, चाहे अमेरिका हो या यूरोप, समाज में शान्ति आएगी।
पर्दा औरतों का अपमान नहीं करता बल्कि उनके शील की पवित्रता और मान की रक्षा करके उन्हें ऊपर उठाता है।

Malik Mehrose
Malik Mehrose is a young entrepreneur, author, blogger, and self-taught developer from Jammu and Kashmir. He is the founder and CEO of SHOPYLL, His startup "SHOPYLL" has emerged a new shine to e-commerce business in Jammu and Kashmir, with a vision to boost the e-commerce ecosystem and to uplift industrialization in Jammu and Kashmir.