जानिए ज़मानत पाने के आधार – How to Get Bail Easily Hindi

जानिए ज़मानत पाने के आधार – How to Get Bail Easily Hindi

How to Get Bail Easily Hindi

How to Get Bail Easily Hindi – आपराधिक मामलों में ज़मानत का विषय हमेशा से ही आम लोगों के मन में जिज्ञासा का विषय रहा है। कोई अपराध पंजीबद्ध होने के बाद सबसे पहले  अभियुक्त को जमानत (Bail) पर रिहा कराना सबसे बड़ी चुनौती हो जाती है जमानत कैसे कराई जाए जमानत के नियम क्या है किन मामलों में (Bail) जमानत होगी कि नहीं होगी इस संबंध में दंड प्रक्रिया संहिता के अध्याय 33 की धाराओं 437 से 450 में विस्तृत प्रावधान दिए गए हैं।

महिला, वृद्ध, छात्र और बीमार होना बन सकता है जमानत का आधार – Grounds of Bail

जमानत (Bail) के यह नियम समझने के पहले यह समझना आवश्यक होगा जमानतीय और अजमानतीय अपराध में अंतर क्या है कौन से अपराध जमानतीय हैं और कौन से गैर जमानती, दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 2A मैं जमानतीय और अजमानतीय अपराध को परिभाषित किया है जमानती अपराध वे अपराध है जिन्हें दंड प्रक्रिया संहिता की प्रथम अनुसूची में जमानतीय अपराध के रुप में दर्शाया गया है या इसके अतिरिक्त अन्य किसी विधि द्वारा उस अपराध को जमानती बनाया गया है.

जमानती अपराधों में जमानत – Bail in Bailable Offence 

जब जमानतीय अपराध का कोई अभियुक्त पुलिस द्वारा बिना वारंट के गिरफ्तार किया जाता है या न्यायालय में पेश होता है अथवा पुलिस द्वारा लाया जाता है अगर वह अपनी जमानत देने को तैयार है तो ऐसा व्यक्ति जमानत पर छोड़ दिया जाएगा कोई व्यक्ति अगर जमानतीय अपराध गिरफ्तार किया जाता है और 1 सप्ताह के भीतर अपनी जमानत देने में असमर्थ है तो न्यायालय उसे स्वम् के मुचलके पर छोड़ सकेगा। परंतु जमानत जब्त और प्रतिबंधात्मक कार्यवाही में ये नियम लागू नही होता है।(धारा 436)

निरोध की अधिकतम अवधि – कोई अपराधी जेल में बंद है तो जिस अपराध में उसे जेल भेजा गया है उस अपराध की अधिकतम सजा की अवधी का आधे से अधिक की सजा भोग लेने के बाद न्यायालय ऐसे अपराधी को जमानत पर छोड़ देगा अभियोजन पक्ष चाहे तो आरोपी के प्रकार छोड़े जाने का विरोध कर सकता है किसी भी अपराधी को अपराध के लिए अधिकतम कारावास से अधिक जेल में नहीं रखा जाएगा (धारा436A)

अजमानतीय अपराध में जमानत – Bail in Non bailable Offence

जब कोई व्यक्ति कोई गैर जमानती अपराध करता है और पुलिस के द्वारा वारंट के बिना गिरफ्तार करके न्यायलय में हाजिर कराया जाता है या आरोपी स्वयं हाजिर होता है तब मजिस्ट्रेट ऐसे आरोपी को जमानत पर छोड़ सकता है यदि अपराध मृत्यु या आजीवन कारावास से दण्डनीय नही है अथवा पहले कभी किसी अपराध में दोष सिद्ध नहीं किया गया है कोई स्त्री बीमार रोगी व्यक्ति जमानत पर छोड़ा जा सकेगा (धारा 437)

सेशन या उच्च न्यायालय से जमानत (Bail)

जब कोई मजिस्ट्रेट किसी आवाज में गैर जमानती अपराध मैं अभियुक्त को जमानत (Bail) नहीं देता है तब सत्र न्यायालय या उच्च न्यायालय में जमानत (Bail) की अर्जी पेश की जाती है और उच्च न्यायालय या सत्र न्यायालय द्वारा ऐसा आरोपी जमानत पर छोड़ा जा सकता है(धारा 439)

उपस्थित होने के लिए जमानत (Bail) लेना

जब न्यायालय किसी आरोपी को दोषमुक्त करते हुए निर्णय पारित करता है तब ऐसे दोष मुक्त किए हुए आरोपियों से इस बावत जमानत ले सकता है कि अगर निर्णय की अपील की जाती है तो व्यापी न्यायालय के समक्ष हाजिर होंगे ऐसी जमानत और बंधपत्र छह माह तक अस्तित्व में रहते हैं(धारा 437A)

अग्रिम जमानत (Bail)

जब किसी व्यक्ति को यह आशंका है कि उसे किसी अजमानतीय अपराध में गिरफ्तार किया जा सकता है तब ऐसा व्यक्ति सत्र न्यायालय या उच्च न्यायालय के समक्ष जमानत पर रिहा करने के लिए आवेदन प्रस्तुत कर सकता है और न्यायालय ऐसे व्यक्ति को अग्रिम जमानत (Bail) का आदेश दे सकता है।(धारा 438)

आरोपी का रिहा किया जाना

जब किसी आरोपी की जमानत मंजूर कर ली जाती है और आरोपी के द्वारा बंद पत्र एवं जमानत न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत की जाती है तब न्यायालय ऐसे व्यक्ति को जोड़े जाने के लिए जेलर को रिहाई आदेश जारी करेगा और यह आदेश के पालन में अभियुक्त तुरंत छोड़ दिया जाएगा(धारा 442)

अतिरिक्त जमानत (Bail) का आदेश

न्यायालय किसी आरोपी कोअतिरिक्त जमानत प्रस्तुत करने का आदेश दे सकता है यदि न्यायालय को यह प्रतीत होता है की भूल अथवा कपट या किसी अन्य कारण से अपर्याप्त जमानत स्वीकार कर ली गई है पर्याप्त जमानत (Bail) प्रस्तुत ना करने की दशा में आरोपी को फिर से जेल भेजा जा सकता है।(धारा 443)

जमानत (Bail) वापस लिया जाना

कोई जमानतदार जिसने किसी आरोपी की जमानत दी है वह अपनी जमानत रद्द करने के लिए मजिस्ट्रेट को आवेदन दे सकता है ऐसी स्थिति में मजिस्ट्रेट आरोपी को पुनः नवीन जमानत प्रस्तुत करने का आदेश देगा और आरोपी  जमानत (Bail) प्रस्तुत नहीं करता है तो आरोपी को जेल के सुपुर्द कर दिया जाएगा।(धारा 444)

नगद धन राशि जमा करना

जब कोई आरोपी अपनी रिहाई के लिए कोई जमानतदार प्रस्तुत नहीं कर पा रहा है कब आरोपी जमानत (Bail) की राशि न्यायालय में नगद जमा करने के लिए अथवा बैंक एफडी या वचन पत्र जमा करने के लिए न्यायालय में आवेदन कर सकता है और न्यायालय द्वारा अनुमति दी जाने पर आरोपी को रिहा किया जा सकता है(धारा 445)

जमानत (Bail) जब्त होने की प्रक्रिया

जब कोई आरोपी न्यायालय से गैरहाजिर रहता है और जमानत (Bail) की शर्तों का पालन नहीं करता है तब न्यायालय द्वारा उसका बंधपत्र सम्पहृत कर लिया जाता है और न्यायालय आरोपी से मुचलका जब्ती की राशि जमा करने की अपेक्षा करेगा।
(धारा 446 एवं 446ए)

अन्य प्रावधान

  • बन्ध पत्र की रकम घटाना(धारा 440)
  • अभियुक्त और प्रतिभुओं का बन्धपत्र(धारा 441)
  • प्रतिभुओं द्वारा घोषणा(धारा 441ए)
  • प्रतिभू का दिवालिया या मृत्यु होने पर प्रक्रिया (धारा 447)
  • अवयस्क का बन्धपत्र (धारा 448)
  • धारा 446 के आदेशों की अपीलें(धारा 449)
  • जमानत की राशि वसूलने की शक्ति (धारा450)

Read More : – 

Malik Mehrose
Malik Mehrose is a young entrepreneur, author, blogger, and self-taught developer from Jammu and Kashmir. He is the founder and CEO of SHOPYLL, His startup "SHOPYLL" has emerged a new shine to e-commerce business in Jammu and Kashmir, with a vision to boost the e-commerce ecosystem and to uplift industrialization in Jammu and Kashmir.