How to deal with traffic police in Hindi | By Mehrose

How to deal with traffic police in Hindi – आज के समय में जनता की यह एक आम शिकायत है कि ट्रैफिक पुलिस गलत चालान काटती है या चालान में ज्यादा जुर्माने का डर दिखाकर पैसे वसूलती है या कुछ विनती करने पर या गलत चालान का विरोध करने पर अपने अधिकारों का गलत इस्तेमाल करते हुए चालान में कुछ ऐसे भी मामले जोड़ देती है जो गलती Driver ने की ही नहीं है।

How to deal with traffic police in Hindi

In fact : ट्रैफिक पुलिस का हमारी डेली लाइफ में एक अलग Importance है। ट्रैफिक पुलिस सड़क पर है फिर भी रोड एक्सीडेंट का ये हाल है कि आये दिन किसी न किसी Accident  के बारे में सुनने को मिलते रहता है, अगर ट्रैफिक पुलिस हो ही नहीं तो सोचिये क्या हाल होगा। वैसे हमारे समाज में ऐसे लोगों की भी कमी नहीं है जो नियम क़ानून को तोड़ने में ही अपनी बहादुरी समझते है ऐसे लोग सिर्फ कानूनी डंडे कि ही भाषा समझते है, अगर उनका चालान नहीं किया गया, उन्हें सजा नहीं दी गई तो ऐसे लोगों की संख्या दिनोदिन बढ़ती जायेगी।

ट्रैफिक पुलिस के कामकाज को हम तीन लेवल पर देख सकते है

1.बधाई के पात्र (Greetings characters): जब ट्रैफिक पुलिस ईमानदारी से Traffic  सम्भाल रही होती है चाहे वो गरमी की चिलचिलाती धूप हो या फिर ठिठुरती सर्दी। बारह घंटे की ड्यूटी में उनका जो हाल होता है ये तो वही जानते है। ट्रैफिक पुलिस के ऐसे Hard work को सलाम करने का मन करता है और वो surely अपने इस काम के लिए बधाई के पात्र है।

2.दया के पात्र (Mercy characters): जब ट्रैफिक पुलिस दवाब के तहत काम करती है, जैसे कि ऊपर से उनको चालान काटने का एक टारगेट दिया हुआ होता है कि आपको इस महीने इतना चालान काटना ही काटना है और बेचारे ट्रैफिक पुलिस जैसे तैसे चालान काटकर अपना कोटा पूरा कर रहे होते है, तो ऐसी Situation में वो सिर्फ दया के पात्र है।

3.दंड के पात्र (Penalties characters): जब ट्रैफिक पुलिस किसी गाड़ी को रोककर कागजात चेक करे और उसमे कोई गलती नहीं होने के बावजूद भी जबरदस्ती कोई गलती निकाले या फिर गाड़ी से जुड़ी दूसरी कोई भी गलती निकाल करके और उस गलती के लिए चालान होने पर ज्यादा जुर्माने का डर दिखाकर रिश्वत मांगे और विरोध करने पर चालान काटकर अपनी मर्जी से ऐसे ऑफेंस भी जोड़ दे जो आपने किये ही नहीं और इस तरह वो अपनी कलम की ताकत का अहसास आपको कराये तो ऐसी Situation में वो सिर्फ और सिर्फ दंड के पात्र है।

क्या करें अगर ट्रैफिक पुलिस ने आपका गलत चालान काट दिया? : सुप्रीम कोर्ट ने Lucknow Development Authority और एम् के गुप्ता के केस का निपटारा करते हुए 5-11-1993 को अपने फैसले में कहा था कि-  “सभी सरकारी कर्मचारी जनता के नौकर है, इसलिए सरकारी कर्मचारियों की Activity उनकी सेवा में Described duties के अनुसार ही होनी चाहिए न कि जनता के साथ अन्याय (Injustice) व उनकी परेशानी का सबब। अगर कोई भी सरकारी कर्मचारी अपनी किसी duty से जनता के साथ अन्याय (Injustice) व उनके लिए परेशानी खड़ी करता है तो वो उस कर्मचारी द्वारा उसके पद का दुरूपयोग (Misuse)  माना जाएगा, जिसके लिए उनके साथ किसी भी क़ानून के तहत रियायत नहीं बरती जा सकती इस जुर्म का फल उनको ही भोगना पडेगा,  High officials को चाहिए कि वो ऐसे  Corrupt officials की एक्टिविटी का अलग से रिकार्ड रखे”

हमारे देश में क़ानून से ऊपर कोई भी नहीं है। क़ानून तोड़ने वाले या अपने कानूनी अधिकारों का दुरूपयोग (Misuse) करने वाले अधिकारियों के लिए कहीं भी माफ़ी नहीं है। इसलिए अगर आप गलत नहीं है और ट्रैफिक पुलिस ने फिर भी आपका चालान काट दिया सिर्फ इसलिए कि आपने उनकी जेब गरम नहीं की, तो आपको उनके खिलाफ एक्शन लेना चाहिए.

ऐसे में आपको कुछ पॉइंट्स को फॉलो करना चाहिए:-

1.ऐसे ट्रैफिक पुलिस के खिलाफ एक लिखित शिकायत (Written complaint) फ़ौरन अगले ही दिन रिलेटेड जिले के  traffic superintendent को दें, या फिर जिले के Senior superintendent of police को दें।

2.हरियाणा और चंडीगढ़ में गलत चालान होने पर चालान फॉर्म पर ड्राईवर अपना सिग्नेचर करने से पहले अपनी कॉमेंट्स भी दर्ज कर सकता है। दुसरे स्टेट्स के रहने वाले अपने स्टेट के ट्रैफिक हेल्पलाईन से जुड़ी जानकारी हासिल करके कि above facility available है या नहीं फिर कॉमेंट्स दर्ज करे।

3 .रोड पर ट्रैफिक पुलिस से ज्यादा बहस ना करें वरना वो आपके ऊपर एक और ऑफेंस जोड़ सकता है “बदतमीजी” का।

4.चालान कटवाकर उसका भुगतान करके उसकी रसीद हासिल करें। फिर अपनी लिखित शिकायत (Written complaint) के साथ चालान और भुगतान की रसीद attached करें।

5.याद रखे चालान के समय शालीनता (Decency) से पेश आकर और चालान का भुगतान करके आपने अपने आप को एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में पेश किया है। चालान भुगतने का मतलब यह कतई नहीं है कि आपने उस गलत ऑफिसर की शिकायत करने का अपना अधिकार खो दिया है।

6.अपनी शिकायत पर हुई करवाई रिपोर्ट की कॉपी मांगे और कोई करवाई नहीं होने पर उनके कारणों के बारे में पूरी जानकारी अपने सूचना के अधिकार के तहत मांगे।

7.याद रखें कि सूचना का अधिकार आपके द्वारा दी गई शिकायत को फाईलों में दफ़न नहीं होने देगा और वांछित जानकारी (Desired information) और रिजल्ट जरूर देगा, आप शुरुआत तो करें।

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Malik Mehrose
Malik Mehrose is a young entrepreneur, author, blogger, and self-taught developer from Jammu and Kashmir. He is the founder and CEO of SHOPYLL, His startup "SHOPYLL" has emerged a new shine to e-commerce business in Jammu and Kashmir, with a vision to boost the e-commerce ecosystem and to uplift industrialization in Jammu and Kashmir.