शहद के बेशुमार फायदे – Honey Huge Benefits Hindi | Full Guide

शहद के बेशुमार फायदे – Honey Huge Benefits Hindi

Honey benefits hindi

Honey benefits Hindi – शहद Honey प्रकृति का अनमोल वरदान है। मधुमक्खियां फूलों की मिठास तथा मधुरिमा को अपनी मेहनत द्वारा छत्ते में एकत्रित करती जाती है और वही शहद कहलाता है। शहद हर तरह की बिगड़ी (खराब) वायु को ठीक करता है, गुर्दे की पथरी तोड़ता है, पुराने बलगम को खत्म करता है, जिगर को मजबूत करता है, शरीर को साफ करता है, महिलाओं का रुका हुआ मासिक-धर्म जारी करता है और दूध को बढ़ाता है। शहद हल्का होता है, पेट मे शहद जाते ही तुरंत पचकर खून में मिल जाता है और शरीर में ताकत का संचय (जोड़) देता है।

शहद Honey को जिस चीज के साथ लिया जाये उसी तरह के असर शहद में दिखाई देते है। जैसे गर्म चीज के साथ लें तो- गर्म प्रभाव और ठंडी चीज के साथ लेने से ठंडा असर दिखाई देता है। शहद Honey से शक्कर निकाला जाता है। शहद में शक्कर के दाने देखकर उसकी विशुद्धता पर संदेह नहीं करना चाहिए। शहद पर देश, काल स्थान का असर पड़ता हैं। इनके रूप, रंग, स्वाद में अंतर होता है। शहद में पोटैशियम होता है, जो रोग के कीटाणुओं का नाश करता है। कीटाणुओं से होने वाले रोग- जैसे आंतरिक बुखार (टायफायड) ब्रान्कोनिमानियां आदि अनेक रोगों के कीटाणु शहद से खत्म हो जाते हैं। यदि किसी मनुष्य की त्वचा पीली है, तो इसका कारण होता है खून में आयरन की कमी होना। शहद में लौह तत्त्व अधिक होता है।

सुबह-शाम भोजनोपरान्त (भोजन के बाद) नींबू के रस में शहद Honey मिलाकर अथवा दूध में शहद मिलाकर सेवन करना लाभकारी होता है। शहद में 50 प्रतिशत ग्लूकोज, फ्रक्टोज 37 प्रतिशत, सुक्रोज 20 प्रतिशत, माल्टोज बीस प्रतिशत और इतना ही डेक्सट्रिन्स, गोंद, मोंम क्लोरोफील और सुगन्ध के अंश होते हैं। विटामिन `ए´ `बी6´ `बी12´ और थोड़ी मात्रा में विटामिन `सी´ भी होता है। शहद खाने में मधुर (मीठा) लगता है। इसमें शरीर के लिए आवश्यक खनिज पदार्थ- मैगनीज, लोहा, तांबा, सिलिका, पोटाशियम, कैल्शियम, फॉस्फोरस, आयोडीन, गन्धक, कैरोटिन और एण्टीसैप्टिक तत्व आदि पाये जाते हैं।

शहद Honey का स्वरूप : शहद गाढ़ा, चिपचिपा, हल्के भूरे रंग का, अर्द्ध पारदर्शक, सुगन्धित, मीठा तरल पदार्थ है। यह मधुमक्खियों द्वारा प्राकृतिक रूप से तैयार किया जाता है। इसमें पानी तथा शक्कर होता है किन्तु यह चीनी बाजार में मिलने वाली कृत्रिम शक्कर जैसी नहीं बल्कि फल एवं फूलों की शर्करा होती है जो मधुमक्खियों द्वारा बड़े परिश्रम से एकत्रित किया जाता है।

शहद Honey के प्रकार : मधुमक्खियों द्वारा 8 तरह का शहद तैयार किया जाता है। उनके नाम बनाने वाली मधुमक्खियों के आधार पर ही पड़े हैं।

  • पीले रंग की बड़ी मक्खियों द्वारा बनाया गया तेल जैसे रंग का शहद- माक्षिक शहद कहलाता है। यह शहद आंखों के रोगों को दूर करने वाला, हल्का एवं पीलिया, बवासीर, क्षत, श्वास, क्षय और खांसी को दूर करता है।
  • भौंरों के द्वारा बनाया गया और स्फटिक मणि जैसे निर्मल शहद भ्रामर शहद कहलाता है। यह शहद खून की गन्दगी को खत्म करता है, मूत्र में शीतलता लाने वाला, भारी, पाक में मीठा, रसवाही, नाड़ियों को रोकने वाला, अधिक चिकना और शीतल होता है।
  • छोटी पिंगला मक्खियों द्वारा बनाया हुआ शहद क्षौद्र शहद कहलाता है। यह शहद पिंगल वर्ण का माक्षिक शहद के समान गुणों वाला और विशेषकर मधुमेह का नाश करने वाला है।
  • मच्छर जैसी अत्यंत सूक्ष्म काली और दंश से अतिशय पीड़ा करने वाली मक्खियों द्वारा निर्मित घी जैसे रंग का शहद पौतिक शहद कहलाता है। यह शहद सूखा और गरम होता है। जलन, पित्त, रक्तविकार और वायुकारक, मूत्रकृच्छ और मधुमेह नाशक, गांठ एवं क्षत का नाशक है।
  • पीले रंग की वरता नामक मक्खियां हिमालय के जंगलों में शहद के छत्राकर छत्ते बनाती हैं। यह शहद छात्र शहद कहलाता है। यह शहद पिंगल, चिकना, शीतल और भारी है एवं चर्म रोग, कीड़े, रक्तपित, मधुमेह, शंका, प्यास, मोह और जहर को दूर करने वाला होता है।
  • भ्रमर के जैसी और तेज मुख वाली पीली मक्खियों का नाम अर्ध्य है। उनके द्वारा बनाया गया शहद आर्ध्यमधु कहलाता है। यह शहद आंखों के लिए लाभकारी, कफ तथा पित्त को नष्ट करने वाला, कषैला, तीखा, कटु और बल में पुष्टिदायक है।
  • बाबी में रहने पिंगल वर्ण बारीक कीड़े पीले रंग का शहद बनाते हैं। वह शहद औद्दोलिक शहद कहलाता है। यह मीठा-रुचिकर, स्वर सुधारक, कोढ़ और जहर को मिटाने वाला कषैला, गरम खट्टा, पाक में तीखा और पित्तकारक है। यह शहद बहुत कठिनाई से मिलता है।
  • फूलों से झड़कर पत्तों पर जमा हुआ मीठा, कषैला, और खट्टा, मकरन्द (फूल का रस) दाल शहद कहलाता है। यह शहद हल्का, जलन, कफ को तोड़ने वाला, रुचिकारक, कषैला, रूक्ष, उल्टी और मधुमेहनाशक, अत्यंत मीठा स्निग्ध, पुष्टिदायक और वजन में भारी है। यह शहद वृक्षोद्रव माना जाता है।

शहद Honey पैदा करनें वाली मधुमक्खियों के भेद के अनुसार वनस्पतियों की विविधता के कारण शहद के गुण, स्वाद और रंग में अंतर पड़ता है। शहद पर प्रदेश, व काल का भी असर पड़ता है। जैसे- हर्र, नीम तथा अन्य वृक्षों पर बने हुए शहद के छत्ते के शहद सम्बन्धित वृक्षों के गुण आते हैं। जिस समय शहद एकत्रित किया जाता है उस समय का असर भी शहद पर पड़ता है। शीतकाल या बसंतऋतु में विकसित वनस्पति के रस में से बना हुआ शहद उत्तम होता है और गरमी या बरसात में एकत्रित किया हुआ शहद Honey इतना अच्छा नही होता है। गांव या नगर में मुहल्लों में बने हुए शहद Honey के छत्तों की तुलना में वनों में बनें हुए छत्तों का शहद Honey अधिक उत्तम माना जाता है।

शहद Honey दो तरह का माना जाता है।

  • पहला- मक्खिया शहद
  • दूसरा- कृतिया शहद।

जिस शहद Honey की मक्खियों को उड़ाने की कोशिश करने पर वे चिढ़ कर डंक मारती हो वह `मक्खिया शहद´ कहलाता है। जिस छते पर पत्थर फेंकने पर मक्खियां उड़कर डंक नही मारती उसे `कृतिया शहद´ कहते हैं।

दोनों तरह के शहद के गुणों और स्वाद में भी थोड़ा-सा अंतर होता है। कृतिया शहद की मक्खियां बहुत छोटी होती हैं और वे यथाशक्ति पेड़ के पोले(खाली जगह) हिस्से में शहद का छत्ता बनाती है। भौरों की मादाओं के शहद की तुलना मक्खियों का शहद उत्तम माना जाता है। शहद के छतों में से वर्ष में दो बार शहद लेने का उचित समय एक चैत-बैसाख और दुसरा कार्तिक मास के शुक्लपक्ष में हैं। बरसात के मौसम शीतल होने के कारण शहद पतला और खट्टा होता है। शहद में मौजूद लौह आदि क्षार रक्त को प्रतिअम्ल बनाते हैं। वह खून के लाल कणों को बढ़ाता है। शहद शरीर को गर्मी व ताकत प्रदान करता है।

शहद Honey का खट्टापन श्वास, खांसी, हिचकी आदि श्वसनतंत्र सम्बन्धी रोगों में लाभदायक होता है। गरम चीजों के साथ शहद का सेवन नहीं करना चाहिए। शहद सेवन करने के बाद गरम पानी भी नहीं पीना चाहिए। गरमी से पीड़ित व्यक्ति को गरम ऋतु में दिया हुआ शहद जहर की तरह कार्य करता है। शहद गर्मियों में प्राप्त किया जाता है।

वैज्ञानिकों के अनुसार : शहद Honey में 42 प्रतिशत शर्करा, 35 प्रतिशत द्राक्षशर्करा होती है। बाकी ग्लूकोज की मात्रा होती है। ग्लूकोज खून में जल्दी ही मिलकर पच जाता है। उसे पचाने के लिए शरीर के अन्य अवयवों को मेहनत करनी नहीं पड़ती। शहद की शर्करा पचने में ज्यादा हल्की, जलन पैदा करने वाली, उत्तेजक, पोषक, बलदायक है। इसलिए जठराग्नि की मंदता, बुखार, वमन, तृषा, मधुमेह, अम्लपित्त, जहर, थकावट, हृदय की कमजोरी आदि में शहद ज्यादा ही लाभदायक सिद्ध होता है। मधुशर्करा में सोमल, एन्टिमनी, क्लोरोफोर्म, कार्बनटेट्राक्लोराइड, आदि जहरीले द्रव्यों का असर खत्म करने की शक्ति भी होती है। शहद की अम्लता में सेब का मौलिक एसिड और संतरे में साइट्रिक एसिड होता है। यह अम्लता जठर को उत्तेजित करती है और पाचन में सहायक बनती है। शहद की अम्लता और एन्जाइम के कारण आंतों की आकुन्चन गति से वेग मिलता है। आंतों की कैपीसिटी (क्षमता) बढ़ती है, मल चिकना बनता है और आसानी से बाहर निकलता है।

शहद Honey मात्रा से ज्यादा नहीं खाना चाहिए। बच्चे बीस से पच्चीस ग्राम और बड़े चालीस से पचास ग्राम से अधिक शहद एक बार में न सेवन करें। लम्बे समय तक अधिक मात्रा में शहद का सेवन न करें। चढ़ते हुए बुखार में दूध, घी, शहद का सेवन जहर के तरह है। यदि किसी व्यक्ति ने जहर या विषाक्त पदार्थ का सेवन कर लिया हो उसे शहद Honey खिलाने से जहर का प्रकोप एक-दम बढ़कर मौत तक हो सकती है। शहद Honey की विकृति या उसका कुप्रभाव कच्चा धनिया और अनार खाने से दूर होता है।

विभिन्न भाषाओं में शहद Honey के नाम :

संस्कृतक्षौद्र, भृंगवात, पुश्पासव, कुसुमासव, मकरन्द रस, माध्वीक, माक्षिक, मधु, सारघ, पुष्परसाहृवय।
हिंदीमधु, शहद
मराठीमधु
गुजरातीमधु
पंजाबीशहत
मलयालमलावा, मद्र, आपेर मद्दु
बंगालीमौ, मधु
तेलगुत्यन् त्येना
तमिलत्यन् त्येना
कन्नड़जेनुतुप्प
फारसीअगवीन
अरबीइंजुवीन, असल उल-नहल
अंग्रेजीहनी Honey
लेटिनमेल

शुद्ध शहद Honey की पहचान :

  • शहद की कुछ बूंदे पानी में डालें। यदि यह बूंदे पानी में बनी रहती है तो शहद असली है और शहद की बूंदे पानी में मिल जाती है तो शहद में मिलावट है। रूई की बत्ती बनाकर शहद में भिगोकर जलाएं यदि बत्ती जलती रहे तो शहद शुद्ध है।
  • एक ज़िंदा मक्खी पकड़कर शहद में डालें। उसके ऊपर शहद डालकर मक्खी को दबा दें। शहद असली होने पर मक्खी शहद में से अपने आप ही निकल आयेगी और उड़ जायेगी। मक्खी के पंखों पर शहद नहीं चिपकता।
  • कपड़े पर शहद डालें और फिर पौंछे असली शहद कपडे़ पर नहीं लगता है।
  • कागज पर शहद डालने से नीचे निशान नहीं आता है।
  • शुद्ध शहद को कुत्ता नहीं खाता।
  • शुद्ध शहद में खुशबू रहती है। वह सर्दी में जम जाता है तथा गरमी में पिघल जाता है।

शहद Honey सेवन विधि : यदि शहद से कोई हानि हो तो नींबू का सेवन करें। ऐसी स्थिति में नीबू का सेवन करना रोगों को दूर कर लाभ पहुंचाता है। शहद को दूध, पानी, दही, मलाई, चाय, टोस्ट, रोटी, सब्जी, फलों का रस, नींबू आदि किसी भी वस्तु में मिलाकर खा सकते हैं। सर्दियों में गर्म पेय के साथ गर्मियों में ठंडे पेय के साथ तथा वर्षा ऋतु में प्राकृतिक रूप में ही सेवन करना चाहिए।

शहद को अग्नि (आग) पर कभी गरम नही करना चाहिए और न ही अधिक गर्म चीजें शहद में मिलानी चाहिए इससे शहद के गुण समाप्त हो जाते हैं। इसको हल्के गरम दूध या पानी में ही मिला कर सेवन करना चाहिए। तेल, घी, चिकने पदार्थ के साथ सममात्रा (समान मात्रा) में शहद मिलाने से जहर बन जाता है।

हानिकारक : ज्यादा मात्रा में शहद का सेवन करने से ज्यादा हानि होती है। इससे पेट में आमातिसार रोग पैदा हो जाता है और ज्यादा कष्ट देता है। इसका इलाज ज्यादा कठिन है। फिर भी यदि शहद के सेवन से कोई कठिनाई हो तो 1 ग्राम धनिया का चूर्ण सेवन करके ऊपर से बीस ग्राम अनार का सिरका पी लेना चाहिए।

विभिन्न रोगों का इलाज :

1. बिस्तर में पेशाब करना : कुछ बच्चे रात में सोते समय बिस्तर में ही मूत्र (पेशाब) कर देते हैं। यह एक बीमारी होती है। सोने से पहले रात में शहद का सेवन कराते रहने से बच्चों का निद्रावस्था में मूत्र (पेशाब) निकल जाने का रोग दूर हो जाता है।

2. पेट दर्द :

  • एक चम्मच शुद्ध शहद शीतल पानी में मिलाकर पीने से पेट के दर्द को आराम मिलता है।
  • एक चुटकी सौंठ को थोड़े से शहद में मिलाकर चाटने से काफी लाभ होता है।
  • दो तुलसी की पत्तियां पीस लें। फिर इस चटनी को आधे चम्मच शहद के साथ सेवन करें।
  • रात्री को सोते समय एक गिलास गुनगुने पानी में एक चम्मच शहद मिलाकर पी लें। इसके इस्तेमाल से सुबह पेट साफ हो जाता है।

3. अजीर्ण :

  • एक गिलास पानी में एक चम्मच नींबू का रस तथा आधा चम्मच शहद मिलाकर लेना चाहिए। इससे अजीर्ण का रोग नष्ट हो जाता है।
  • शहद में दो काली मिर्च का चूर्ण मिलाकर चाटना चाहिए।
  • अजवायन थोड़ा सा तथा सौंठ दोनों को पीसकर चूर्ण बना लें। इस चूर्ण को शहद के साथ चाटें।
  • शहद को जरा सा गुनगुने पानी के साथ लेना चाहिए।

4. दस्त :

  • शहद में सौंफ, धनिया तथा जीरा का चूर्ण बनाकर मिला लें और दिन में कई बार चाटें। इससे दस्त में लाभ मिलता है।
  • अनार दाना चूर्ण शहद के साथ चाटने से दस्त बंद हो जाते हैं।

5. पेट में कीड़े : अजवायन का चूर्ण एक चुटकी को एक चम्मच शहद के साथ लेना चाहिए। दिन में तीन बार यह चूर्ण लेने से पेट के कीड़े मर जाते हैं।

6. भूख न लगना :

  • सौंठ, कालीमिर्च, पीपल, सेंधानमक इन सब चीजों को मिलाकर चूर्ण बना लें। इस चूर्ण में से आधी चुटकी लेकर एक चम्मच शहद के साथ सुबह, दोपहर और शाम को इसका इस्तेमाल करें।
  • एक दो कालीमिर्च तथा दो लौंग को पीसकर शहद के साथ चाटना चाहिए।

7. अम्लपित्त : धनिया तथा जीरा लेकर चूर्ण बना लें और शहद मिलाकर धीरे-धीरे चाटना चाहिए। इससे अम्लपित्त नष्ट होता है।

8. कब्ज : सौंफ, धनियां तथा अजवायन इन तीनों को बराबर मात्रा में लेकर पीस लें। फिर इस चूर्ण में से आधा चम्मच चूर्ण को शहद के साथ सुबह, दोपहर और शाम को इसका सेवन करना चाहिए। इससे कब्ज दूर होती है।

9. बवासीर : रात्रि को सोते समय एक चम्मच त्रिफला-चूर्ण या एरण्ड का तेल एक गिलास दूध के साथ लेना चाहिए। इससे कब्ज दूर हो जाती है।

10. पीलिया :

  • त्रिफला का चूर्ण शहद के साथ सेवन करें। इससे पीलिया का रोग नष्ट हो जाता है।
  • गिलोय का रस 12 ग्राम शहद के साथ दिन में दो बार लें।
  • नीम के पत्तों का रस आधा चम्मच शहद के साथ सुबह-शाम सेवन करना चाहिए।
  • कलमी शोरा तथा जवाखार मिलाकर पानी के साथ दिन में तीन बार सेवन करने से पेशाब साफ आने लगता है।

11. सिर का दर्द :

  • सिर पर शुद्ध शहद का लेप करना चाहिए। कुछ ही समय में सिर का दर्द खत्म हो जायेगा।
  • आधा चम्मच शहद और एक चम्मच देशी घी मिलाकर सिर पर लगाना चाहिए। घी तथा शहद के सूखने के बाद दोबारा लेप करना चाहिए।
  • यदि पित्त के कारण सिर में दर्द हो तो दोनों कनपटियों पर शहद लगायें। साथ ही थोड़ा शहद भी चाटना चाहिए।
  • सर्दी, गर्मी या पाचन क्रिया की खराबी के कारण सिर में दर्द हो तो नींबू के रस में शहद को मिलाकर माथे पर लेप करना चाहिए।
  • कागज के टुकड़ों पर शहद और चूना को मिलाकर माथे के जिस भाग में दर्द हो उस भाग पर रख देने से सिर का दर्द दूर हो जाता है।
  • भोजन के साथ शहद लेने से सिर का दर्द दूर हो जाता है।

12. रतौंधी :

  • शहद को सलाई या अंगुली की सहायता से काजल की तरह आंखों में सुबह के समय तथा रात को सोते समय लगाना चाहिए।
  • काजल में शहद मिलाकर बराबर लगाते रहने से भी रतौंधी की बीमारी समाप्त हो जाती है।
  • शहद को आंखों में काजल की तरह लगाने से रतौंधी रोग दूर होता है। आंखों की रोशनी भी बढ़ती है।

13. आंख में जलन :

  • शहद के साथ निबौंली (नीम का फल) का गूदा मिलाकर आंखों में काजल की तरह लगना चाहिए।
  • शुद्ध शहद को सलाई या अंगुली की सहायता से काजल की तरह आंख में लगायें।

14. आंखों के रोग :

  • एक ग्राम गुरुच का रस तथा आधा चम्मच शहद को मिला लें। फिर इसे आंखों में नियम से रोज सलाई से लगायें। आंखों की खुजली, दर्द, मोतियाबिंद तथा अन्य सभी रोगों के लिए यह उपयोगी अंजन (काजल) है।
  • चार ग्राम गिलोय का रस लेकर उसमें दो ग्राम शहद मिलाकर लोशन बना लें। इसे आंखों में लगायें। आंखों के सभी रोगों में इससे लाभ होगा।
  • रोज सुबह ताजे पानी से आंखों को छप्पा (पानी की छींटे) मारकर धोना चाहिए। इसके बाद दो बूंदे नीम का रस तथा चार बूंदे शहद मिलाकर आंखों में लगाना चाहिए।
  • कड़वे तेल से बना हुआ काजल शुद्ध शहद के साथ मिलाकर आंखों में लगाना चाहिए।

15. मुंह के छाले :

  • तवे पर सुहागे को फुलाकर शहद के साथ छालों पर लगाना चाहिए। इससे मुंह के छाले ठीक हो जाते हैं।
  • छोटी इलायची को पीसकर बारीक चूर्ण बना लें। फिर शहद में मिलाकर छालों पर लगायें।
  • फिटकरी को पानी में घोल लें और एक चम्मच शहद के साथ मिलाकर कुल्ला करें। यह कुल्ला भोजन करने से पहले सुबह, दोपहर तथा शाम को करना चाहिए।
  • पेट में गर्मी ज्यादा हो तो त्रिफला का चूर्ण शहद के साथ लेना चाहिए। केवल आंवले का चूर्ण शहद के साथ लेने से भी पेट की गर्मी शांत होती है और मुंह के छाले ठीक होने लगते हैं।

16. आवाज का बैठ जाना :

  • फूली हुई फिटकरी पीसकर शहद के साथ मिलाकर सेवन करें। इसमें पानी मिलाकर कुल्ला किया जा सकता है।
  • मुलहठी का चूर्ण शहद के साथ चाटना चाहिए।
  • कुलंजन मुंह में रखकर चूसने से भी आवाज खुल जाती है।
  • 3 से 9 ग्राम बहेड़ा के चूर्ण को शहद के साथ सुबह और शाम सेवन करने से स्वरभंग (गला बैठना) और गले के दूसरे रोग भी ठीक हो जाते हैं।
  • 1 कप गर्म पानी में 1 चम्मच शहद डालकर गरारे करने से आवाज खुल जाती है।

17. थूक के साथ बलगम आना :

  • छाती पर शहद की मालिश करके गुनगुने पानी से धो लें। इससे थूक के साथ बलगम का आना बंद हो जाता है।
  • रात्रि को सोने से पहले अजवायन का तेल छाती पर मलें।
  • पिसी हुई हल्दी, अजवायन और सौंठ को मिलाकर एक चुटकी लेकर शहद में मिलाकर सेवन करें।

18. पायरिया :

  • मसूढ़ों तथा दांतों पर शुद्ध शहद की मालिश करके गुनगुने पानी से कुल्ला करना चाहिए।
  • नींबू का रस, नीम का तेल तथा शहद मिलाकर मसूढ़ों की मालिश करके कुल्ला कर लें।
  • लहसुन, करेला, अदरक का रस निकालकर शहद में मिलाकर मसूढ़ों पर रोज लगाना चाहिए। तीन-चार दिन तक लगातार मालिश करने से पायरिया तथा मसूढ़ों के अन्य रोग खत्म हो जाते हैं।

19. खांसी की बीमारी :

  • लाल इलायची लेकर इसे भून लें और चूर्ण बना लें, इसमें शहद मिलाकर सेवन करें।
  • मुनक्का, खजूर, कालीमिर्च, बहेड़ा तथा पिप्पली-सभी को समान मात्रा में लेकर कूट लें और उसमें से दो चुटकी चूर्ण लेकर शहद में मिलाकर सेवन करें।
  • 3 ग्राम सितोपलादि के चूर्ण को शहद में मिलाकर दिन में तीन बार चाटकर खाने से खांसी दूर हो जाती है।
  • 5 ग्राम शहद में लहसुन के रस की 2-3 बूंदे मिलाकर बच्चे को चटाने से खांसी दूर हो जाती है।
  • एक नींबू पानी में उबालें फिर निकालकर कांच के गिलास में निचोड़ लें। इसमें 28 मिलीलीटर ग्लिसरीन और 84 मिलीलीटर शहद मिलाकर हिलाएं। एक-एक चम्मच चार बार पीने से खांसी बंद हो जाती है।
  • शहद खांसी में आराम देता है। 12 ग्राम शहद को दिन में तीन बार चाटने से कफ निकल जाता है और खांसी ठीक हो जाती है।
  • थोड़ी सी फिटकरी को तवे पर भून लेते हैं। इस 1 चुटकी फिटकरी को शहद के साथ दिन में 3 बार चाटने से खांसी में लाभ मिलता है।

20. काली खांसी : सबसे पहले रोगी की कब्ज को दूर करना चाहिए। इसके लिए एरण्ड का तेल पिलाया जा सकता है। इसके बाद चिकित्सा आरम्भ शुरू करनी चाहिए। चिकित्सा के लिए शहद में लौंग के तेल की एक बूंद तथा अदरक के रस की दस बूंदे मिलाकर सुबह, दोपहर और शाम को देनी चाहिए।

21. दमा.

  • शहद में कुठार रस 4 बूंद मिलाकर दिन में 3-4 बार देना चाहिए। इससे दमा का रोग नष्ट हो जाता है।
  • सोमलता, कूट, बहेड़ा, मुलेठी, अडूसा के पत्ते, अर्जुन की छाल तथा काकड़ासिंगी सबका एक समान मात्रा में लेकर पीस लें। इसमें से एक चम्मच चूर्ण शहद के साथ सेवन करें। प्यास लगने पर गर्म पानी पीयें।

22. पसलियों में दर्द : सांभर सींग को पानी में घिसकर शहद के साथ मिलाकर पसलियों पर लेप करना चाहिए।

23. शक्तिवर्द्धक : एक कप दूध में एक चम्मच शहद मिलाकर सुबह के समय पीने से ताकत बढ़ती है।

24. जुकाम :

  • शहद और अदरक का रस एक-एक चम्मच मिलाकर सुबह-शाम दिन में दो बार पीने से जुकाम खत्म हो जाता है और भूख बढ़ जाती है।
  • 2 चम्मच शहद, 200 मिलीलीटर गुनगुना दूध और आधे चम्मच मीठे सोडे को एक साथ मिलाकर सुबह और शाम पीने से जुकाम, फ्लू ठीक हो जाता है। इसको पीने से बहुत पसीना आता है पर पसीना आने पर रोगी को हवा नहीं लगने देना चाहिए।
  • 20 ग्राम शहद, आधा ग्राम सेंधानमक और आधा ग्राम हल्दी को 80 मिलीलीटर पानी में डालकर उबाल कर रख लें। कुछ देर बाद जब पानी हल्का सा गर्म रह जाये तो इस पानी को सोते समय पीने से जुकाम दूर हो जाता है।

25. बिच्छू का डंक : बिच्छू के डंक मारे हुए स्थान पर शहद लगाने से दर्द कम हो जाता है।

26. जलन :

  • नियमित सुबह 20 ग्राम शहद ठंडे पानी में मिलाकर सेवन करने से जलन, खुजली और फुन्सियों जैसी चर्म रोग जड़मूल से समाप्त हो जाती है।
  • शरीर के जले हुए अंगो पर शहद लगाने से जलन दूर होती है। जख्म होने पर शहद को तब तक लगाते रहे जब तक कि जख्म ठीक ना हो जायें। जख्म ठीक होने के बाद सफेद निशान बन जाते हैं। उन पर शहद लगाकर पट्टी बांधते रहने से निशान मिट जाते हैं।

27. शीघ्रपतन : स्त्री-संग सम्भोग से एक घण्टा पहले पुरुष की नाभि में शहद में भिगोया हुआ रूई का फोहा रखने से पुरुष का जल्दी स्खलन नही होता अर्थात पुरुष का लिंग शिथिल नहीं होता है।

28. बलगम युक्त खांसी :

  • 5 ग्राम शहद दिन में चार बार चाटने से बलगम निकल कर खांसी दूर होती है।
  • शहद और अडूसा के पत्तों का रस एक-एक चम्मच तथा अदरक का रस आधा चम्मच मिलाकर पीने से खांसी नष्ट हो जाती है।

29. उल्टी :

  • गुड़ को शहद में मिलाकर सेवन करने से उल्टी बंद हो जाती है।
  • उल्टी होने पर शहद को चाटने से उल्टी होना बंद हो जाती है।
  • शहद में लौंग का चूर्ण मिलाकर चाटने से गर्भावस्था में उल्टी आने से छुटकारा मिलता है।

30. रक्तविकार : बकरी के दूध में आठवां हिस्सा शहद मिलाकर पीने से खून साफ हो जाता है। इसका प्रयोग करते समय नमक और मिर्च का त्याग कर देना आवश्यक है।

31. यक्ष्मा या टी.बी. :

  • ताजा मक्खन के साथ शहद का सेवन करने से क्षय रोग में लाभ होता है।
  • शहद में करेले का चूर्ण डालकर चाटना चाहिए।

32. हाईब्लडप्रेशर : दो चम्मच शहद और नींबू का रस एक चम्मच मिलाकर सुबह-शाम दिन में दो से तीन बार सेवन करने से हाई बल्डप्रेशर में लाभ होता है।

33. कान दर्द :

  • कान में शहद डालने से कान की पीव और कान का दर्द नष्ट हो जाता है।
  • कान में कनखजूरा सदृश जीव-जंतु घुस गया हो तो शहद और तेल मिलाकर उसकी कुछ बूंदे कान में डालने से लाभ होता है।

34. आंख आना :

  • 1 ग्राम पिसे हुए नमक को शहद में मिलाकर आंखों में सुबह और शाम लगाऐं।
  • सोनामक्खी को पीसकर और शहद में मिलाकर आंखों में सुबह और सांय लगाए।
  • चन्द्रोदय वर्ति (बत्ती) को पीसकर शहद के साथ आंखों में लगाने से आंखों के रोग दूर होते हैं।

35. आंख के सभी रोगों में :

  • लगभग 7 से 14 मिलीलीटर बकुल रस को शहद के साथ लेना चाहिए। इससे आंखों के सभी रोग नष्ट हो जाते हैं।
  • लगभग 7 से 14 मिलीलीटर धान्यक रस को 5 से 10 ग्राम शहद के साथ लेना चाहिए।
  • लगभग 2 से 6 ग्राम त्रिफला चूर्ण 12 से 24 ग्राम शहद से दिन में 3 बार लेना चाहिए।

36. आंखों के रोहे, फूले : आंख के फूले मे अपमार्ग की जड़ को शहद में घिसकर लगाने से आंख के फूले समाप्त हो जाते हैं।

37. आंखों का दर्द : आंखों में किसी चीज के गिर जाने से अगर दर्द हो रहा हो तो शहद या एरण्ड तेल (कस्टर आयल) की 1 से 2 बूंद आंखों मे डालने से आंख में गिरी हुई चीज बाहर आ जायेगी और आंखों की चुभन दूर हो जायेगी।

38. आंखों का नासूर : असली और साफ शहद को आग पर गर्म करने के लिये रख दे और इसमे समुद्रझाग पीसकर मिला दे फिर आग पर से उतार लें। इसकी बत्ती बनाकर आंखों के नासूर में रखने से आंखों का नासूर पूरी तरह भरकर ठीक हो जाता है।

39. मलेरिया का बुखार : शुद्ध शहद 20 ग्राम, सैंधानमक आधा ग्राम, हल्दी आधा ग्राम को पीसकर 80 ग्राम की मात्रा में गर्म पानी में डालकर रात को पीने से मलेरिया का बुखार और जुकाम ठीक हो जाता है।

40. फेफड़ों के रोग : फेफड़ों के रोगों में शहद लाभदायक रहता है। श्वास में और फेफड़ों के रोगों में शहद अधिक प्रयोग करते हैं।

41. दांतों का दर्द :

  • 1 चम्मच शहद में, लहसुन का रस 20 बूंद मिलाकर प्रतिदिन सुबह-शाम चाटें। इससे पायरिया, मसूढ़ों की सूजन, दर्द, मुंह की दुर्गन्ध आदि खत्म होती है।
  • मसूढ़ों में सूजन व खून निकलने के कारण दांत हिलने लगते हैं। शहद अथवा सरसों के तेल से कुल्ला करने से मसूढ़ों का रोग नष्ट हो जाता है।

42. इन्फ्लुएन्जा :

  • शहद में पीपल का 1 चुटकी चूर्ण मिलाकर चाटने से आराम मिलता है।
  • 2 चम्मच शहद, 200 मिलीलीटर गर्म दूध, आधा चम्मच मीठा सोड़ा मिलाकर सुबह और शाम को पिलाने से इन्फ्लुएन्जा पसीना आकर ठीक हो जाता है।

43. दांत निकलना : बच्चों के दांत निकलते समय मसूढ़ों पर शहद मलने से दांत निकलते समय दर्द में आराम रहता है।

44. मोतियाबिंद :

  • मोतियाबिंद शुरू होते ही निर्मली को शहद में घिसकर लगाने से मोतियाबिंद दूर हो जाता है।
  • 9 भाग छोटी मक्खी का शहद, 1 भाग अदरक का रस, 1 भाग नींबू का रस और 1 भाग सफेद प्याज का रस इन सबको मिलाकर और छानकर एक बूंद सुबह और शाम आंखों में डालते रहें इससे मोतियाबिंद दूर हो जाता है। इसमे 12 भाग गुलाब जल डालकर रोजाना इसी प्रकार डालने से आंखों की रोशनी बढ़ती है और चश्मा हट जाता है।
  • स्वस्थ आंखों में असली शहद की एक सलाई हफ्ते मे 1 से 2 बार डालने से आंखों की रोशनी कभी कम नही होगी, बल्कि उम्र बढ़ने के साथ-साथ तेज होती चली जायेगी। साथ ही खाने के लिए चार बादाम रात को पानी में भिगो कर रख लें और सुबह उठते ही चार काली मिर्च के साथ पीसकर मिश्री के साथ चाटे या वैसे ही चबा जाऐं और ऊपर से दूध पी लें।

45. निमोनिया : निमोनिया रोग में रोगी के शरीर की पाचन-क्रिया प्रभावित होती है इसलिए सीने तथा पसलियों पर शुद्ध शहद की मालिश करें और थोड़ा सा शहद गुनगुने पानी में डालकर रोगी को पिलाने से इस रोग में लाभ होता है।

46. नखटन्ड :

  • 10 मिलीलीटर शल्लकी स्वरस (रस) और 1 ग्राम शहद को मिलाकर दिन में 2 बार प्रयोग करना चाहिए।
  • 1 ग्राम समुद्रफेन, 5 मिलीलीटर औरत का दूध और शहद का अंजन (काजल) को आंखों में रोजाना 2 बार प्रयोग करना चाहिए।

47. जीभ की प्रदाह और सूजन : जीभ के रोग में शहद को घोलकर मुंह में भरकर रखने से जीभ के रोग में लाभ होता है।

48. गर्भनिरोध :

  • चूहे की मींगनी शहद में मिलाकर योनि में रखने से गर्भ नहीं ठहरता है।
  • शहद 250 ग्राम को हाथी की लीद (गोबर) का रस 250 मिलीलीटर की मात्रा में शहद के साथ ऋतु (माहवारी) होने के बाद स्त्रियों को सेवन कराने से गर्भधारण नहीं होता है।

49. खून की उल्टी : लाख के पानी में शहद मिलाकर पीने से खून की उल्टी होना  रुक जाती है।

50. मुंह के छाले : नीलाथोथा लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग को भुन पीसकर 10 ग्राम शहद में मिलालें। इस मिश्रण को रूई से छालों पर लगायें तथा लार बाहर निकलने दें। मुंह की गंदगी लार के रूप में मुंह से बाहर निकाल कर छालों को ठीक करती है।

51. गर्भावस्था का भोजन : गर्भावस्था में महिलाओं के शरीर में रक्त की कमी आ जाती है। गर्भावस्था के समय रक्त बढ़ाने वाली चीजों का अधिक सेवन करना चाहिए। महिलाओं को दो चम्मच शहद प्रतिदिन सेवन करने से रक्त की कमी नहीं होती है। इससे शारीरिक शक्ति बढ़ती है और बच्चा मोटा और ताजा होता है। गर्भवती महिला को गर्भधारण के शुरू से ही या अंतिम तीन महीनों में दूध और शहद पिलाने से बच्चा स्वस्थ और मोटा ताजा होता है।

52. हिचकी का रोग :

  • शहद में उंगली डूबोकर दिन में 3 बार चाटने से हिचकी से आराम मिलता है।
  • शहद और काला नमक में नींबू का रस मिलाकर सेवन करने से हिचकी से आराम मिलता है।
  • प्याज के रस में शहद मिलाकर चाटने से हिचकी बंद हो जाती है।

53. कान का दर्द :

  • लगभग 3 ग्राम शहद, 6 मिलीलीटर अदरक का रस, 3 मिलीलीटर तिल का तेल और लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग सेंधानमक को एक साथ मिलाकर इसकी थोड़ी सी बूंदे कान में डालकर उसके ऊपर से रूई लगा देने से कान से कम सुनाई देना, कान का दर्द, कान में अजीब-अजीब सी आवाजे सुनाई देना आदि रोग दूर हो जाते हैं।
  • 5 मिलीलीटर सूरजमुखी के फूलों का रस, 5 ग्राम शहद, 5 मिलीलीटर तिल का तेल और 3 ग्राम नमक को मिलाकर कान में बूंद-बूंद करके कान में डालने से कान का दर्द ठीक हो जाता है।

54. बहरापन : शहद में समुद्रफेन को घिसकर कान में डालने से बहरेपन का रोग ठीक हो जाता है।

55. नपुंसकता : शहद और दूध मिलाकर पीने से धातु (वीर्य) की कमी दूर होती है। और शरीर बलवान होता है।

56. कान का बहना : शहद और नीम की गोंद को बराबर मात्रा में एक साथ मिलाकर कान में 2-2 बूंद डालने से कान मे से मवाद का बहना बंद हो जाता है।

57. कान के रोग :

  • शहद की 3-4 बूंदे कान में डालने से कान का दर्द पूरी तरह से ठीक हो जाता है।
  • कान को अच्छी तरह से साफ करके उसमे रसौत, शहद और और औरत के दूध को एक साथ मिलाकर 2-3 बूंदे रोजाना 3 बार कान में डालने से कान में से मवाद का बहना बंद हो जाता है।

58. कान में कुछ पड़ जाना : रूई की एक बत्ती बनाकर शहद में भिगो लें और कान में धीरे-धीरे से घुमायें। ऐसा करने से कान में जितने भी छोटे-मोटे कीड़े-मकोड़े होगें वो बत्ती के साथ चिपककर बाहर आ जायेंगे।

59. घाव :

  • पुराने से पुराने घाव में हरीतकी को पानी में पीसकर शहद के साथ मिलाकर लेप करने से घाव शीघ्र ही ठीक हो जाता है।
  • शहद लगाने से घाव जल्द भरते है।

60. कौआ गिरना : 4 से 6 ग्राम शहद को कालक का चूर्ण 1 से 3 ग्राम मिलाकर दिन में 2 बार लेने से रोग में लाभ होता है।

61. पक्षाघात-लकवा-फालिस फेसियल, परालिसिस :

  • लगभग 20 से 25 दिन तक रोजाना लगभग 150 ग्राम शहद शुद्ध पानी में मिलाकर रोगी को देने से शरीर का लकवा ठीक हो जाता है।
  • लगभग 28 मिलीलीटर पानी को उबालें और इस पानी के ठंडा होने पर उसमें दो चम्मच शहद डालकर पीड़ित व्यक्ति को पिलाने से कैल्शियम की मात्रा शरीर में उचित रूप में आ जाती है जोकि लकवे से पीड़ित भाग को ठीक करने में मददगार होती है।

62. आंव रक्त (पेचिश) : शहद में एक चुटकी अफीम मिलाकर और उसमें घिसकर चाटने से पेचिश के रोगी का रोग दूर हो जाता है।

63. भगन्दर : शहद और सेंधानमक को मिलाकर बत्ती बनायें। बत्ती को नासूर में रखने से भगन्दर रोग में आराम मिलता है।

64. मोच : मोच के स्थान पर शहद और चूना मिलाकर हल्की मालिश करने से आराम होता है।

65. प्रसव में देरी : स्त्री को गुनगुने गर्म पानी के टब में बैठायें तथा शहद में भिगोये हुए कपडे़ को योनि में रखे। इससे सर्दी का असर दूर हो जाता है और प्रसव हो जाता है।

66. प्यास अधिक लगना :

  • शहद को मुंह में भरकर कुछ देर तक रखकर कुल्ला करें। इससे तेज प्यास शांत हो जाती है।
  • पानी में शहद या चीनी मिलाकर पीने से गले की जलन व प्यास मिट जाती है।
  • 20 ग्राम शहद को मुंह में 10 मिनट तक रखें फिर कुल्ला कर दें। इससे अधिक तेज प्यास भी शांत हो जाती है।

67. जलोदर :

  • 20 ग्राम शहद में 40 मिलीलीटर पानी डालकर उबालकर रख लें, फिर इस पानी को पिलाने से जलोदर की बीमारी में लाभ होता है।
  • शहद और पीपल का चूर्ण छाछ में मिलाकर पीने से लाभ होगा।

68. मासिक स्राव : शहद के साथ कबूतर की बीट मिलाकर खाने से रजोदर्शन (माहवारी) होता है और बांझपन दूर हो जाता है।

69. शीतपित्त :

  • केसर 6 ग्राम, शहद 25 ग्राम रोगी को सुबह-शाम खिलाने से शीतपित्त में लाभ मिलता है।
  • एक चम्मच शहद और एक चम्मच त्रिफला मिलाकर सुबह-शाम खाने से भी लाभ होता है।

70. मोटापा (स्थूलता) दूर करने के लिए : 120 ग्राम से लेकर 240 ग्राम शहद को 100 से 200 मिलीलीटर गुनगुने पानी में मिलाकर दिन में 3 बार खुराक के रूप में सेवन करें।

71. गिल्टी (ट्यूमर) : चूना और शहद को अच्छी तरह से मिलाकर गिल्टी पर लगाने से रोग में आराम मिलता है।

72. मोटापा बढ़ाना : शहद का रोज दूध में मिलाकर सेवन करने से मोटापा बढ़ता हैं।

73. नींद में चलना :

  • शहद के साथ लगभग 1-2 ग्राम पोस्ता पीसकर इसको शहद में घोलकर रोजाना सोने से पहले रोगी को देने से अच्छी नींद आती है। इससे रोगी को आराम से नींद आ जाती है।
  • शहद के साथ लगभग 3-9 ग्राम बहेड़ा के चूर्ण को रोगी को सुबह और शाम को सेवन करने से लाभ प्राप्त होता है।

74. नींद ना आना (अनिद्रा) :

  • एक-एक चम्मच नींबू का रस और शहद को मिलाकर रात को सोने से पहले दो चम्मच पीने से नींद आ जाती है। जब नींद खुले तब दो चम्मच पुन: लेने पर नींद आ जाती है और यदि केवल पानी के गिलास में शहद की दो चम्मच डालकर पीने से नींद आ जाती है।
  • शहद या शर्करा के शर्बत में पोस्तादाना को पीसकर इसको घोलकर सेवन करने से नींद अच्छी आती है।

75. पेट के कीड़े :

  • दो चम्मच शहद को 250 मिलीलीटर पानी में डालकर दिन में दो बार सुबह और शाम पीने से लाभ होता है।
  • थोड़ी मात्रा में सेवन करने से भी पेट के कीड़े समाप्त हो जाते हैं।

76. आधासीसी (माइग्रेन) :

  • इस रोग में सूर्य उगने के साथ दर्द का बढ़ना और ढलने के साथ सिर दर्द का कम होना होता है, तो जिस ओर सिर में दर्द हो रहा हो उसके दूसरी ओर के नाक के नथुने में एक बूंद शहद डालने से सिर के दर्द में आराम मिलता है।
  • रोजाना भोजन के समय दो चम्मच शहद लेते रहने से आधे सिर में दर्द व उससे होने वाली उल्टी आदि बंद हो जाती हैं।

77. नाक के रोग : शहद या गुड़ के साथ गूलर के पके हुए फल को खाने से नाक से खून आना बंद हो जाता है।

78. आक्षेप कंपकंपाना :

  • शहद के साथ लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग से लगभग 1 ग्राम सुहागे की खील (लावा) को चटाने से आक्षेप और मिर्गी में बहुत आराम आता है।
  • शहद के साथ लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग जटामांसी का चूर्ण सुबह और शाम रोगी को देने से आक्षेप के दौरे ठीक हो जाते हैं।

79. पेट में दर्द :

  • शहद का प्रयोग करने से खाना खाने के बाद होने वाले पेट दर्द  समाप्त होते है।
  • शहद और पानी मिलाकर पीने से पेट के दर्द में राहत मिलती है।

80. तंग योनि को शिथिल करना : 10 ग्राम शहद को 5 ग्राम देशी घी में मिलाकर योनि पर लगाने से तंग योनि शिथिल होती है।

81. भूलने की बीमारी : शहद के साथ लगभग तीन ग्राम कलौंजी का सुबह के समय सेवन करने से भूलने की बीमारी दूर हो जाती है।

82. बुद्धि का विकास कम होना : शहद के साथ लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग चांदी की भस्म सुबह और शाम को लेने से बुद्धि के विकास में वृद्धि होती है।

83. छाती का दर्द : शहद और पीपल का पीसा हुआ चूर्ण छाछ के साथ पीने से छाती के दर्द में लाभ मिलता है।

84. चिड़चिडा स्वभाव और मन की उदासी दूर करना : शहद के साथ गुल्म कुठार की लगभग 1 या 2 गोलियां सुबह और शाम को देने से चिड़चिड़ा स्वभाव और मन की उदासी दूर हो जाती है।

85. याददास्त बढ़ाना :

  • शहद में लगभग 3 ग्राम कलौंजी का चूर्ण मिलाकर चाटने से याददास्त तेज हो जाती है।
  • लगभग 30 ग्राम शहद के साथ 20 ग्राम घी मिलाकर भोजन के बाद रोजाना लेने से दिमाग की याददास्त तेज होती है।

86. खाज-खुजली :

  • 6 ग्राम से 10 ग्राम तक गर्म पानी में शहद मिलाकर 45 से 60 दिन तक लगातार पीने से हर प्रकार के चमड़ी के रोग, लाल चकते (निशान), खाज-खुजली ठीक हो जाते है। यहां तक की कोढ़ के रोग में भी आराम हो जाता है।
  • शुद्ध आमलासार गन्धक को शहद में मिलाकर खाने से खुजली पूरी तरह से ठीक हो जाती है। गन्धक को रोगी के रोग के लक्षण के मुताबिक लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग तक दे सकते है।

87. उच्चरक्तचाप कम करने के लिए: उच्चरक्तचाप कम करने के लिए शहद का प्रयोग लगभग एक सप्ताह तक करें।

88. हृदय की दुर्बलता : प्रतिदिन 5-7 ग्राम मधु पानी में मिलाकर पीने से हृदय की निर्बलता नष्ट होती है।

89. त्वचा के रोग  :

  • फुंसियों पर असली शहद लगाने से त्वचा के रोग जल्दी ठीक हो जाते हैं।
  • काली मिट्टी में थोड़ा सा शहद डालकर शरीर में जहां पर फोड़े-फुंसिया हो वहां पर लगाने से लाभ होता है।

90. हाथ-पैरों की अकड़न : हड़ताल की राख (भस्म) में लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग शहद को मिलाकर रोजाना सुबह-शाम खाने से हाथ व पैरों की अकड़न दूर हो जाती है।

91. हृदय की दुर्बलता : शहद हृदय को शक्ति देने के लिए विश्व की समस्त औषधियों से सर्वोत्तम हैं इससे हृदय इतना शक्तिशाली हो जाता है जैसे घोड़ा हरे जौ खाकर शक्ति प्राप्त करता है। शहद के प्रयोग से हृदय के पुट्टों की सूजन दूर हो जाती है। जहां यह रोग-ग्रस्त हृदय को शक्ति देता है वहां स्वस्थ हृदय को पुष्ट और शक्तिशाली बनाता है, हृदय फेल होने से बचाता है। जब रक्त में ग्लाइकोजन के अभाव से रोगी को बेहोश होने का डर हो तो शहद खिलाकर रोगी को बेहोश होने से बचाया जा सकता हैं शहद मिनटों में रोगी में शक्ति व उत्तेजना पैदा करता हैं। सर्दी या कमजोरी के कारण जब हृदय की धड़कन अधिक हो जाये, दम घुटने लगे तो दो चम्मच शहद सेवन करने से नवीन शक्ति मिलती है। हृदय की दुर्बलता, दिल बैठना आदि कोई कष्ट हो तो शहद की एक चम्मच पानी में डालकर पिलायें। एक चम्मच शहद प्रतिदिन लेने से हृदय सबल व मजबूत बनता है।

92. हिस्टीरिया :

  • शहद या दूध के साथ लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग से लगभग आधा ग्राम घोड़ बच (बच) को रोजाना रोगी को देते रहने से हिस्टीरिया रोग खत्म हो जाता है। इसको अधिक मात्रा में नहीं देना चाहिए अन्यथा उल्टी और सिर दर्द हो सकता है।
  • लगभग 10 ग्राम शहद या केले के फल के रस के साथ ऊंटकटेरा की जड़ का सेवन करने से हिस्टीरिया रोग ठीक हो जाता है।

93. घबराहट : हृदय की घबराहट, दुर्बलता आदि जब मालूम हो एक कप गर्म पानी में दो चम्मच घोलकर पीजिए। नित्य दो-तीन बार मधु का सेवन अवश्य करें।

94. कण्ठमाला : 10 ग्राम सिरस के बीजों के चूर्ण को कपड़े में छानकर उसमें 20 ग्राम शहद मिलाकर किसी कांच के बर्तन में डालकर 15 दिन के लिये धूप में रख दें। 15 दिन के बाद चूर्ण को रोजाना सुबह 5 से 10 ग्राम तक खायें और ऊपर से मिश्री मिला हुआ दूध पी लें। इससे कण्ठमाला (गले की गांठों) में आराम आता है।

95. चेचक (बड़ी माता) : शहद चाटने से चेचक में लाभ होता है।

96. क्रोध :

  • लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग से 1 ग्राम घोड़ बच के साथ शहद सुबह और शाम को रोजाना खाने से क्रोध शांत हो जाता है।
  • शहद के साथ 7 मिलीलीटर से 10.50 मिलीलीटर गुरुच का रस मिलाकर सुबह-शाम को खाने से पित्त द्वारा उत्पन्न क्रोध शांत हो जाता है।

97. नाखूनों का जख्म : नाखूनों के जख्म में हरीतकी पानी में पीसकर शहद में मिलाकर नाखून पर लेप करने से नाखून का दर्द व जख्म शीघ्र ठीक हो जाता है।

98. पीलिया रोग :

  • शुरू में दो दिन तक एक चम्मच मधु की खुराक दो बार दें फिर चार दिन आधे चम्मच के साथ मधु और आंवले का चूर्ण मिलाकर तीन बार दें। अगले चार दिन आधा चम्मच मधु और लौह चूर्ण मिलाकर तीन बार दें।
  • प्रतिदिन तीन बार एक-एक चम्मच शहद एक गिलास पानी में मिलाकर पिलाने से लाभ होता है।

99. नसूर (पुराना घाव) : सेंधानमक तथा शहद लपेटकर बत्ती बना लें, इसे नासूर पर रखने से घाव में पीव का बनना बंद हो जाता है।

100. मिरगी (अपस्मार) : 10 ग्राम शहद के साथ 10 ग्राम ब्राह्मी के पत्तों को मिलाकर रोजाना खिलाने से मिरगी के दौरे दूर हो जाते हैं।

101. दाद : शहद के साथ मजीठ को पीसकर लगाने से हर प्रकार के दाद और चमड़ी के रोग ठीक हो जाते हैं।

102. पसलियों का दर्द : सिन्दूर की थोड़ी मात्रा शहद में मिलाकर साफ कपड़ें पर लगाकर कपड़े को पसलियों के दर्द वाले जगह पर चिपका दें और पसली की सिकाई करें तो रोग में जल्द आराम मिलता है।

103. मिरगी (अपस्मार) : शहद के साथ 5 ग्राम भैंस के खुर की भस्म को चाटने से मिरगी के कारण आने वाले दौरे दूर हो जाते हैं।

104. सूखा रोग : शुद्ध शहद को मां के दूध में मिलाकर बच्चे को 20-25 दिन तक रोजाना पिलाएं।

105. तुण्डिका शोथ (टांसिल) : दालचीनी को पीसकर उसमें शहद मिलाकर दिन में दो बार चाटने से तुण्डिका शोथ (टांसिल) का रोग ठीक हो जाता है।

106. विसर्प-फुंसियो का दल बनना :

  • आटे और शहद को मिलाकर लेप बना लें। फिर इसे किसी कपडे़ के टुकड़े पर लगाकर फुंसियों पर लगा लें इससे जल्द लाभ होगा।
  • 1 गिलास गर्म पानी में 3 चम्मच शहद को मिलाकर कुछ महीनों तक रोजाना पीने से फोड़े और फुंसिया दूर हो जाती है।
  • शहद या नारियल के पानी के साथ 0.24 ग्राम से 0.48 ग्राम केसर को सुबह और शाम सेवन करने से फुंसिया का जहर या बहने वाला मवाद बाहर आकर रोग ठीक हो जाता है।

107. मानसिक उन्माद (पागलपन) :

  • लगभग 0.58 ग्राम शहद के साथ 0.40 ग्राम ब्राह्मी के पत्तों का रस और लगभग 0.15 ग्राम कूट के चूर्ण को मिलाकर पीने से पागलपन या उन्माद रोग दूर हो जाता है।
  • शहद के साथ 10 मिलीलीटर ब्राह्मी का रस और 2 ग्राम कूठ के चूर्ण को मिलाकर खाने से बुद्धि का विकास होता है और उन्माद या पागलपन ठीक हो जाता है।
  • शहद के साथ 10 मिलीलीटर ब्राह्मी के पत्तों के रस और 3 ग्राम कुलिंजन के चूर्ण को मिलाकर दिन में तीन बार उन्माद के रोगी को चटाने से उसकी यह बीमारी ठीक हो जाती है।

108. कुष्ठ (कोढ़) :

  • शहद, मोम, सेंधानमक, गुड़, गूगल, गेरू, घी, आक (मदार) का दूध और राल का लेप करने से बहुत दिनों की `बिवाई फटना´ (एड़िया फटना) तथा `पांव फटना´ ठीक हो जाते हैं।
  • शहद या मीठे तेल में नौसादर को मिलाकर लगाने से सफेद कोढ़ मिट जाता है।

109. बालाक्षेप, बालाग्रह : शहद को 1 से 3 ग्राम तेजपत्ता के चूर्ण के साथ चटाने से बच्चों के सभी रोगों में लाभ होता है।

110. बच्चों का पेट बड़ा होना : रोजाना सुबह ठंडे पानी में शहद मिलाकर शर्बत की तरह पिलाने से बच्चें का बढ़ा हुआ पेट कम हो जाता है।

111. बालातिसार और रक्तातिसार :

  • बराबर मात्रा में बेल के फल का मज्जा, धातकी पुष्प, सुगंधवाला प्रकन्द, लोध्र छाल और गज पिप्पली का चूर्ण शहद के साथ दिन में 2 से 3 बार लेना चाहिए।
  • 3 से 6 ग्राम इन्द्रयव को नागरमोथा के साथ काढ़ा बनाकर और उसमें शहद मिलाकर सुबह और शाम सेवन कराने से बच्चों का रक्तातिसार (खूनी दस्त) दूर हो जाता है।

112. बच्चों के रोग :

  • चौकिया सुहागा का फूला शहद में मिलाकर दांत और मसूढ़ों की जड़ में मलने से बच्चों के दांत निकलते वक्त दर्द नहीं होता और दांत आसानी से निकल आते है तथा अतिसार (दस्त) व ज्वर (बुखार) भी ठीक हो जाता है।
  • सोनागेरू को शहद में मिलाकर बच्चों को चटाने से भी उल्टी और हिचकी दूर हो जाती है।
  • अगर पेट बहुत ज्यादा बढ़ गया हो और उसे कम करना हो, तो शीतल जल (ताजे पानी में) शहद मिलाकर रोजाना सुबह पीने से लाभ होता है।
  • धाय के फूल, बेलगिरी, धनिया, लोध, इन्द्रजौ और सुगन्धवाला को बारीक पीसकर शहद में मिलाकर चटनी की तरह चाटने से बच्चों का ज्वारातिसार (बुखार और दस्त) वात-विकार (गैस की बीमारी) समाप्त हो जाती हैं।
  • पीपल वृक्ष की छाल (पीपल के पेड़ की खाल) और कोंपल (मुलायम पत्तों) को पीसकर शहद में मिलाकर लगाने से मुख पाक (मुंह के छाले) दूर हो जाते हैं।
  • 10 मिलीलीटर रस अडूसा, 10 ग्राम शहद और डेढ़ ग्राम जवाक्षर को एक साथ मिलाकर चूर्ण बनाकर रख लें। इस चूर्ण को दिन में  3-4 बार चटाने से बच्चों की कठिन से कठिन खांसी दूर हो जाती है।
  • शहद में छोटी पीपल का बारीक चूर्ण मिलाकर चटाने से बच्चों की खांसी, ज्वर, तिल्ली, अफारा (गैस) तथा हिचकी समाप्त होती है।
  • एक से डेढ़ ग्राम काकड़सिंगी का चूर्ण शहद के साथ चटाने से बच्चों का अतिसार (दस्त) रोग ठीक हो जाता है।
  • सफेद कमल के केसर को पीसकर उसमें मिश्री और शहद को मिलाकर चावलों के पानी के साथ पिलाने से बच्चों को प्रवाहिका रोग समाप्त हो जाता है।
  • धान की खीलें, मुलेठी, खांड और शहद को एक साथ मिलाकर चावलों के पानी के साथ बच्चों को पिलाने से बच्चों का प्रवाहिका रोग ठीक हो जाता है।
  • कुटकी के चूर्ण को शहद में मिलाकर चटाने से हिचकी बंद हो जाती है।
  • कटेरी के फूलों के केसर को पीसकर, उसे शहद में मिलाकर चटाने से बच्चों की पांचों तरह की खांसी दूर हो जाती है।
  • कुटकी को बारीक पीसकर और छानकर शहद में मिलाकर चटाने से बच्चों की बहुत पुरानी वमन (उल्टी) और हिचकी ठीक हो जाती है।
  • प्रियंगु, रसौत और नागरमोथा- इनकों बारीक पीसकर, शहद में मिलाकर चटाने से बच्चों की बढ़ी हुई प्यास, वमन (उल्टी) और दस्त इन रोगों से आराम हो जाता है।
  • लज्जालू, धाय के फूल, लोध और सरिवा का काढ़ा बनाकर ठंडा होने पर इसमें शहद मिलाकर पिलाने से पतले दस्त में भी आराम आ जाता है।

113. खून की कमी : 10 ग्राम शहद, 5 ग्राम आंवला, 200 मिलीलीटर गन्ने का रस मिलाकर पीने से खून के रोग में लाभ होता है।

114. होंठों का फटना : 20 ग्राम शहद में 10 ग्राम सुहागा मिलाकर दिन में तीन बार मलें। इससे होंठो का फटना दूर हो जाता है।

115. त्वचा का सूजकर मोटा और सख्त हो जाना : डेढ़ ग्राम बड़ी इलायची के बीज को शहद में मिलाकर चटा दें और ऊपर से सनाय, अमलतास और बड़ी हरड़ को मिलाकर 25 ग्राम चूर्ण का काढ़ा बनाकर 50 ग्राम पिला दिया जाए तो त्वचा की सूजन में पूरी तरह से लाभ हो जाता है।

116. चेहरे की त्वचा का मुलायम और साफ होना : शुद्ध (असली) शहद में नींबू का रस मिलाकर चेहरे पर लगाने से चेहरे पर झुर्रियां नहीं पड़ती है।

117. सौंदर्यप्रसाधन :

  • मजीठ को शहद में मिलाकर चेहरे पर लेप करने से चेहरे की झाइयां (चेहरे का कालापन) दूर हो जाती है।
  • शहद को चेहरे पर लगाकर दो घंटे तक लगा रहने दें। फिर दो घंटे के बाद चेहरे को गर्म पानी से धो लें। इससे चेहरे पर चमक आ जाती है।

118. गले में गांठ (कण्ठ शालूक) :

  • वरना की जड़ के काढ़े में समान मात्रा में घी और शहद मिलाकर पीने से कण्ठ शालूक (गले में गांठ) में आराम आता है।
  • 1 ग्राम से 4 ग्राम चोपचीनी का चूर्ण शहद में मिलाकर खाने से कण्ठमाला रोग (गले की गांठे) समाप्त हो जाती है।

119. नाड़ी का घाव : दारूहल्दी, थूहर का दूध और आक का दूध इन सब को मिलाकर एक बत्ती बना लें। उसके बाद उस बत्ती को नाड़ी के घाव पर लगाने से नाड़ी के रोग में जल्द आराम मिलता है।

120. कण्ठमाला (गले की गांठे) :

  • शहद में हरड़ का चूर्ण मिलाकर खाने से गले की गांठे ठीक हो जाती है।
  • 100 ग्राम सिरस के बीज को पीसकर 300 ग्राम शहद में मिला लें, फिर इसे चीनी के बर्तन में 40 दिन तक रखा रहने दें। 40 दिन के बाद दस ग्राम दवा को पानी के साथ खाने से कण्ठमाला (गले की गांठे) की जो गिल्टियां (गांठे) निकल चुकी हों वह बैठ जायेंगी और दूसरी गिल्टियां (गांठे) नही निकलेगी।

121. शरीर को शक्तिशाली बनाना : शहद 10 ग्राम, 5 ग्राम घी और 3 ग्राम आंवलासार गन्धक को लेकर इसमें थोड़ी सी शक्कर मिलाकर सेवन करने से शरीर को मजबूती मिलती है।

122. गलकोष प्रदाह : 5 से 10 मिलीलीटर भट्कटैया के फलों के रस को शहद के साथ सेवन करने से गलकोष प्रदाह (गले की जलन) में आराम आता है।

Credit : jkhealthworld

Malik Mehrose
Malik Mehrose is a young entrepreneur, author, blogger, and self-taught developer from Jammu and Kashmir. He is the founder and CEO of SHOPYLL, His startup "SHOPYLL" has emerged a new shine to e-commerce business in Jammu and Kashmir, with a vision to boost the e-commerce ecosystem and to uplift industrialization in Jammu and Kashmir.