ज़्यादा आय मतलब ज़्यादा भरण पोषण – CrPC Section 125 in Hindi

ज़्यादा आय मतलब ज़्यादा भरण पोषण – CrPC Section 125 in Hindi

CrPC Section 125 in Hindi

CrPC Section 125 in Hindi – मेरे पति मुझे मेरे मायके छोड़ कर चले गये और मुझे आने के लिए भी मना कर दिया। वो मुझे साथ रखना नहीं चाहते। मैं ने कोर्ट में 125 और 498 ए के मुकदमे लगा रखे हैं।  मेरे पति प्राइवेट कॉलेज मे प्रोफसर हैं। मेरे पास  उन की सैलरी का प्रमाण नहीं है।   मेरा अंतरिम मेंटेनेन्स 1700 रुपए प्रतिमाह तय हुआ है। जबकि मेरे ससुराल वाले काफ़ी संपन्न हैं। वो मुकदमे की कार्यवाही आगे नहीं बढ़ने दे रहे हैं, ना ही कोई हाल निकालना चाहते हैं।  क्या करूँ बहुत परेशान हूँ। मेरी मदद करें।

ज़्यादा आय मतलब ज़्यादा भरण पोषण – CrPC Section 125 in Hindi

भारत में अदालतों की संख्या आबादी के मुकाबले बहुत कम है। दस लाख की आबादी पर अमरीका में 140 अदालतें हैं और ब्रिटेन में 55 जब कि भारत में इसी जनसंख्या पर केवल 12 अदालतें हैं। वैसी स्थिति में न्याय में देरी होना स्वाभाविक है। 498ए की कार्यवाही तो धीमे ही चलेगी उस पर आपका नियंत्रण नहीं हो सकता। वहाँ अभियोजक सरकार होती है। आपको केवल गवाही के लिए बुलाया जाएगा।

धारा 125 दं.प्र.सं. के भरण पोषण के मामले में आप को अंतरिम राहत न्यायालय ने दे दी है। अब जब भी अन्तिम निर्णय होगा तब जो भी गुजारा भत्ता आप का तय होगा वह आप के द्वारा आवेदन न्यायालय में प्रस्तुत किए जाने की तिथि से प्रभावी होगा। इस तरह यदि आप का गुजारा भत्ता 5000 प्रतिमाह तय होता है तो 1700 के अलावा जितना गुजारा भत्ता बकाया होगा वह आप को बाद में मिल जाएगा। इस लिए आप को चाहिए कि आप 125 दं.प्र.सं. के प्रकरण में उचित गुजारा भत्ता तय होने पर अधिक ध्यान दें। गुजारा भत्ता का आधार हमेशा पति की आर्थिक स्थिति और मासिक आय होती है। मासिक आय तो आप को प्रमाणित  करनी होगी।

आप को चाहिए कि आप पति के निजी कालेज का पता लगाएँ अपने स्तर पर उन की सेलरी की जानकारी करें और आर्थिक स्थिति का ज्ञान करें। धारा 125 दं.प्र.संहिता का प्रकरण अपराधिक कानून का हिस्सा होने के साथ साथ दीवानी प्रकृति का है। इस कारण से दीवानी प्रक्रिया संहिता (सीपीसी) के प्रावधान सिद्धान्त रूप में इस प्रकरण में प्रभावी होते हैं। इकबाल बानो बनाम स्टेट ऑफ यूपी के मामले में 05.06. 2007 को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को दीवानी प्रकृति का माना है।

आप इस मामले में सीपीसी के प्रावधानों केअनुरूप प्रतिपक्षी को देने के लिए प्रश्नावली दे सकती हैं और न्यायालय उन का उत्तर देने का आदेश प्रतिपक्षी को दे सकता है इसी तरह आप कोई भी दस्तावेज जो प्रतिपक्षी के शक्ति और आधिपत्य में है उसे प्रकट और प्रस्तुत कराने के लिए आवेदन न्यायालय को दे सकती हैं। दं.प्र.संहिता में भी धारा 91 में दस्तावेज प्रतिपक्षी से अथवा किसी से भी मंगाया जा सकता है और दस्तावेज लाने वाले को दस्तावेज साथ ला कर बयान देने के लिए कहा जा सकता है।

इस तरह जिस संस्था में आप के पति काम करते हैं उस संस्था के प्रमुख को दस्तावेज ले कर न्यायालय में बुलाने के लिए समन जारी किया जा सकता है। आप इस मामले में अपने वकील से बात करें कि वह सीपीसी और दं.प्र.सं. के प्रावधानों में ऐसे आवेदन प्रस्तुत करे और इस संबंध में न्यायालयों के निर्णय तलाश कर उन का उपयोग करते हुए वस्तु स्थिति को न्यायालय के समक्ष रखे जिस से उचित रूप से आप का गुजारा भत्ता न्यायालय तय कर सके।

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Malik Mehrose
Malik Mehrose is a young entrepreneur, author, blogger, and self-taught developer from Jammu and Kashmir. He is the founder and CEO of SHOPYLL, His startup "SHOPYLL" has emerged a new shine to e-commerce business in Jammu and Kashmir, with a vision to boost the e-commerce ecosystem and to uplift industrialization in Jammu and Kashmir.