जानिए कोर्ट में सुनवाई कैसे होती है – Court Hearing kaise hoti hai Hindi

जानिए कोर्ट में सुनवाई कैसे होती है – Court Hearing kaise hoti hai Hindi

Court Hearing kaise hoti hai Hindi

Court Hearing kaise hoti hai Hindi – कोर्ट में कार्यवाही किस प्रकार की जाती है इस बात से हम लोग ज्यादातर लोग अनभिज्ञ रहते हैं। आपराधिक मुकदमों मैं कार्यवाही दंड प्रक्रिया संहिता के अनुसार होती है दंड प्रक्रिया संहिता में यह विस्तारपूर्वक समझाया गया है कि कौन सा मामला किस न्यायालय में चलेगा और किस प्रकार चलेगा सेशन न्यायालय  मजिस्ट्रेट के न्यायालय में कार्यवाही में क्या अंतर है तथा समन और वारंट मामलों में न्यायालय में सुनवाई की प्रक्रिया क्या होती है पुलिस रिपोर्ट पर संस्थित या फिर परिवाद पर संस्थित मामलों में सुनवाई की प्रक्रिया में क्या मूल भूत अंतर है ये जानने के लिए समन तथा वारंट मामले क्या होते हैं और पुलिस रिपोर्ट पर या परिवाद पर दायर मामले क्या होते हैं ? यह समझना जरुरी है।

समन मामले और वारंट मामले – Summon cases and warrant cases

दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 2 में समन और वारंट मामलों को समझाया गया है वारंट मामला वह है जो मृत्यु आजीवन कारावास या 2 वर्ष की अवधि के कारावास से दंडनीय किसी अपराध से संबंधित है (धारा 2x) तथा वारंट मामलों को छोड़कर बाकी अन्य सभी समन मामले हैं(धारा 2w)

पुलिस रिपोर्ट पर संस्थित और परिवाद पर संस्थित मामले – Case related to libel

पुलिस रिपोर्ट पर संस्थित मामले वह मामले हैं जिनमे एफ आई आर के आधार पर न्यायालय में अभियोग पत्र प्रस्तुत किया जाता है और इसके विपरीत परिवाद मामले धारा 2डी में परिभाषित शिकायत के रूप में मजिस्ट्रेट के समक्ष प्रस्तुत किया जाता है।

सुनवाई की प्रक्रिया – Hearing process

सत्र न्यायालय और मजिस्ट्रेट के न्यायालय में सुनवाई की प्रक्रिया में अंतर है तथा वारंट समन मामलों की सुनवाई की प्रक्रिया में भी अंतर है इसके अतिरिक्त पुलिस रिपोर्ट और परिवाद पर संस्थित मामलों की सुनवाई में भी अंतर है इसके अतिरिक्त संक्षिप्त विचारण के मामलों की प्रक्रिया इन सभी प्रक्रियाओं से भिन्न है इन सभी प्रक्रियाओं को हम इस चार्ट के माध्यम से समझने का प्रयास करेंगे

सत्र न्यायालय की प्रक्रिया – Process of session court

सत्र न्यायालय में कार्यवाही का संचालन लोक अभियोजक द्वारा किया जाता है और कार्यवाही की शुरुआत अभियोजन के मामले के कथन से आरंभ की जाती है अगर न्यायालय को अभिलेख और उसके साथ दी गई दस्तावेजों पर विचार कर लेने तथा आरोपी और अभियोजन के तर्कों को सुनने के बाद अगर यह लगता है आरोपी के विरुद्ध कार्यवाही करने के पर्याप्त आधार नहींहैं तो न्यायालय अभियुक्त को उन्मोचित कर देगा और इसके विपरीत अगर न्यायधीश की है राय है की अभियुक्त के ऊपर मामला चलाना चाहिए सत्र न्यायाधीश आरोप विरचित करेगा और आरोपी से पूछेगा कि वह अपराध स्वीकार करता है अथवा विचारण किए जाने का दावा करता है.

अगर मामला सेशन न्यायालय द्वारा विचारणीय नहीं है तो आरोप विरचित करने के बाद मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट या प्रथम वर्ष में एक मजिस्ट्रेट को मामला अंतरित कर दिया जाएगा जहां अभियुक्त दोषी होने का अभिवचन करता है वहां उसकी स्वीकृति को लेख वध किया जाएगा और न्यायालय स्वविवेक अनुसार आरोपी को दोषसिद्ध भी कर सकता है अगर न्यायालय द्वारा आरोपी को दोष सिद्ध नहीं किया जाता है और आरोपी विचारण का दावा करता है तब न्यायालय अभियोजन साक्षय के लिए तारीख नियत करेगा अभियोजन पक्ष की गवाही और जिरह करने के बाद अगर आरोपी के विरुद्ध पर्याप्त साक्ष्य नहीं होते हैं तो आरोपी को दोष मुक्त कर दिया जाएगा अन्य दशा में आरोपी से अपनी प्रतिरक्षा में साक्ष्य प्रस्तुत करने के लिए कहा जाएगा तथा दोनों पक्षों के वकीलों की बहस के बाद न्यायालय दोषसिद्धि या दोष मुक्ति का निर्णय पारित करेगा

मजिस्ट्रेटों द्वारा सुनवाई की प्रक्रिया – Procedure for hearing by magistrates

Court Hearing kaise hoti hai Hindi – सत्र न्यायालय द्वारा सुनवाई की प्रक्रिया और मजिस्ट्रेट द्वारा सुनवाई की प्रक्रिया में काफी अंतर है मजिस्ट्रेट द्वारा सुनवाई की प्रक्रिया को हम

  1. पुलिस रिपोर्ट पर आधारित वारंट मामले
  2. परिवाद पर आधारित वारंट मामले
  3. समन मामले और
  4. संक्षिप्त विचारण के

मामलों में बांट सकते हैं मजिस्ट्रेट द्वारा पुलिस रिपोर्ट पर आधारित वारंट मामलों की सुनवाई तथा परिवाद मामलों में मजिस्ट्रेट द्वारा सुनवाई और संक्षिप्त विचारण के मामलो की प्रक्रिया में काफी भिन्नताएं है

#1. वारंट मामले (पुलिस रिपोर्ट पर) – वारंट मामलों की सुनवाई करते हुए मजिस्ट्रेट सर्वप्रथम आरोपी पक्ष को उन दस्तावेजों की प्रतियां दिलवाएगा जिन पर अभियोजन का मामला टिका हुआ है या जिस आधार पर आरोपी को अभियोजित किया गया है पुलिस द्वारा प्रस्तुत की गई रिपोर्ट और अन्य दस्तावेजों  पर विचार और अभियुक्त की परीक्षा कर लेने के बाद मजिस्ट्रेट दोनों पक्षों को सुनवाई का अवसर देते हुए अगर आरोपी के विरुद्ध आरोपों को निराधार मानता है तो अभियुक्त को उन्मोचित कर देगा.

और उन्मोचित ना किए जाने की दशा में अभियुक्त के विरोध में आरोप तैयार करेगा मामले में आगे कार्यवाही करेगा यदि कोई आरोपी अपने अपराध किए जाने को स्वीकार करता है तो मजिस्ट्रेट ऐसी स्वीकारोक्ति पर अभियुक्त को दंड दे सकता है या और साक्ष्य एकत्र करने के लिए अभियोजन को साक्ष्य प्रस्तुत करने का निर्देश देता है अभियोजन की साक्ष्य के पश्चात अभियुक्त का परीक्षण करके अभियुक्त को अपनी साथ प्रस्तुत करने का अवसर दिया जाता है ततपश्चात न्यायालय अपना निर्णय सुनाता है।

#2. वारंट मामले (परिवाद पर) – पुलिस रिपोर्ट पर संक्षिप्त मामलों की प्रक्रिया वारंट मामलों की प्रक्रिया से मिलना है वारंट मामलों में सर्वप्रथम अभियोजन किसान अभिलिखित की जाती है और यदि मजिस्ट्रेट को साथ पर्याप्त प्रतीत नहीं होती है तब मजिस्ट्रेट ऐसे अपराध को उनमोचित कर देता है और अगर अभियुक्त को अनुचित नहीं किया जाता है तब मजिस्ट्रेट अभियुक्त के विरुद्ध आरोप तैयार करेगा यदि अभियुक्त अपना अपराध स्वीकार कर लेता है तो मजिस्ट्रेट उसे दंडित कर सकता है यदि अभियुक्त अपनी प्रतिरक्षा करना चाहता है तब मैं अपने बचाव में साथ प्रस्तुत करेगा इस प्रक्रिया के पालन के बाद मजिस्ट्रेट अपना निर्णय पारित करेगा

#3. समन मामले – समन मामलों में पुलिस रिपोर्ट और परिवार पर प्रस्तुत मामलों की प्रक्रिया एक जेसी होती है समय मामलों की शुरुआत अभियुक्त को अभियोग का सारांश बता कर की जाती है। अभियुक्त से मजिस्ट्रेट यह पूछेगा कि वह अपराध स्वीकार करना चाहता है या अपना बचाव करना चाहता है अगर कोई अभियुक्त अपना अपराध स्वीकार कर लेता है तब मजिस्ट्रेट ऐसे अभियुक्त को दोष सिद्ध कर सकेगा और कुछ मामलों में (धारा 206 के अधीन छोटे मामलों में)  अभियुक्त की अनुपस्थिति में भी अभियुक्त के अपराध स्वीकार करने पर अब उसके ऊपर जुर्माना अधिरोपित किया जा सकेगा अगर किसी मामले में अभियुक्त को दोष सिद्ध नहीं किया गया है तो मजिस्ट्रेट अभियोजन पक्ष की साथ सुनेगा और अभियुक्त का परीक्षण करने के उपरांत  बचाव साक्ष्य के बाद दोषसिद्धि अथवा दोषमुक्ति का निर्णय पारित करेगा।

#4. संक्षिप्त मामले – संक्षिप्त मामलों में कोई मजिस्ट्रेट ऐसे मामलों का संक्षेप में विचारण कर सकता है जो 2 वर्ष से कम की अवधि के लिए दंडनीय है या फिर अपराध चोरी से संबंधित है जहां चुराई गई संपत्ति का मूल्य ₹2000 से अधिक नहीं है या चुराई गई संपत्ति प्राप्त करने की दशा में संपत्ति का मूल्य ₹2000 से अधिक नहीं है अथवा रात्रि के समय किसी व्यक्ति के घर में घुस ना अथवा लोग शांति भंग करने के आशय से अपमान करना अथवा किसी को धमकी देना आदि मामलों में संक्षिप्त विचारण किया जा सकेगा उच्च न्यायालय द्वितीय वर्ग के मजिस्ट्रेटों को जुर्माने से दंडनीय या छह माह के कारावास से और जुर्माने से दंडनीय अपराध के संक्षिप्त विचरण करने का शक्ति प्रदान कर सकता है संक्षिप्त विचारण किए गए किसी मामले में 3 माह से अधिक के कारावास का दंडदेश नहीं दिया जाएगा

अन्य विशेष प्रावधान – Other special provisions

Court Hearing kaise hoti hai Hindi – धारा 236-पूर्व दोषसिद्धि, धारा 237- धारा 199(2) के अधीन संस्थित मामलों में प्रक्रिया, धारा 249 परिवादी की अनुपस्थिति , धारा 250 उचित कारण के बिना अभियोग के लिए प्रतिकर, धारा 256 परिवादी का हाजिर नहीं होना या उसकी मृत्यु, धारा 257 परिवाद को वापस लेना, धारा 258 कुछ मामलों में कार्यवाही रोक देने की शक्ति, धारा 259 समन मामलों को वारंट मामलों में संपरिवर्तन करने की न्यायालय की शक्ति, धारा 263 संछिप्त विचारों में अभिलेख, धारा 264 संक्षिप्त विचार मामलों में निर्णय, धारा 265 अभिलेख और निर्णय की भाषा

Malik Mehrose
Malik Mehrose is a young entrepreneur, author, blogger, and self-taught developer from Jammu and Kashmir. He is the founder and CEO of SHOPYLL, His startup "SHOPYLL" has emerged a new shine to e-commerce business in Jammu and Kashmir, with a vision to boost the e-commerce ecosystem and to uplift industrialization in Jammu and Kashmir.